सुपौल। सुपौल अभियंत्रण महाविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग द्वारा आयोजित एक सप्ताह की राष्ट्रीय कार्यशाला के चौथे दिन विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने अपने तकनीकी व्याख्यान प्रस्तुत किए। कार्यशाला का विषय सेमीकंडक्टर डिवाइस, फोटोनिक्स और इंटेलिजेंट ऑटोमेशन जैसे उभरते तकनीकी क्षेत्रों पर आधारित है। इसमें देश के विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थी और प्राध्यापक ऑनलाइन तथा ऑफलाइन माध्यम से भाग ले रहे हैं।
पहले तकनीकी सत्र में भागलपुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की डॉ. पुष्पलता ने कम्युनिकेशन सिस्टम में उपयोग होने वाले आधुनिक सेमीकंडक्टर डिवाइस के विकास में अनुसंधान की भूमिका पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने छात्रों को प्रयोगात्मक कार्यों और नवाचार के माध्यम से तकनीकी दक्षता विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
दूसरे तकनीकी सत्र में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दुर्गापुर के प्रो. रजत महापात्र ने उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक और मॉस्फेट आधारित इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के विकास पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में मॉस्फेट का उपयोग मेमोरी डिवाइस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और स्मार्ट डिवाइस के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इसके बाद भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) वाराणसी के डॉ. किशोर सरावडेकर ने उन्नत माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और वीएलएसआई तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने छात्रों को डिजिटल लॉजिक डिजाइन और सिंथेसिस से भी अवगत कराया।
अगले तकनीकी सत्र में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कुरुक्षेत्र के डॉ. डबलू कुमार ने आधुनिक ऑप्टिकल टेक्नोलॉजी के उपयोग पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि नई पीढ़ी की इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के विकास में उन्नत सर्किट सिमुलेशन और डिजाइन टूल्स का महत्वपूर्ण योगदान है।
इसके पश्चात भागलपुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डॉ. प्रशांत कुमार ने एचडीएल प्रोग्रामिंग के विभिन्न अनुप्रयोगों तथा डिजिटल सर्किट डिजाइन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला और छात्रों को तकनीकी परियोजनाओं के माध्यम से अपने कौशल को विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
दिन के अंतिम तकनीकी सत्र में सरकारी अभियंत्रण महाविद्यालय वैशाली के डॉ. रवि रंजन ने आधुनिक ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और उभरती तकनीकों के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को उद्योगोन्मुख तकनीकी कौशल विकसित करने के महत्व के बारे में बताया।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों के लिए आकलन एवं फीडबैक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने दिनभर के तकनीकी सत्रों से प्राप्त ज्ञान और अनुभव साझा किए।
कार्यशाला के संयोजक एवं डीन एकेडेमिक्स डॉ. चंदन कुमार ने बताया कि इस कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को सेमीकंडक्टर, फोटोनिक्स, वीएलएसआई डिजाइन और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक तकनीकों से संबंधित नवीनतम शोध और तकनीकी जानकारी प्राप्त हो रही है, जो उनके शैक्षणिक एवं शोध कार्यों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष रवि रंजन, पंकज कुमार सिंह, शादाब आज़म सिद्दीकी सहित विभाग के अन्य सहायक प्राध्यापक तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। आयोजन समिति के अनुसार कार्यशाला के आगामी सत्रों में भी देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ अपने व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अच्युतानंद मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में सेमीकंडक्टर और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक तकनीकें वैश्विक तकनीकी विकास की आधारशिला बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय कार्यशालाएं छात्रों को नवीनतम तकनीकों से परिचित कराने के साथ-साथ अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को विशेषज्ञों के अनुभवों से अधिकतम लाभ उठाने की सलाह दी।

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