सुपौल। त्रिवेणीगंज मुख्यालय में शनिवार को राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय इकाई, अनूपलाल यादव महाविद्यालय, त्रिवेणीगंज के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर संगोष्ठी एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हेमंत कुमार ने की, जबकि संचालन एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी सह जिला नोडल पदाधिकारी प्रो. विद्यानंद यादव द्वारा किया गया।
इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर में संगोष्ठी के साथ-साथ चयनित ग्राम नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 20 स्थित दलित बस्ती, त्रिवेणीगंज में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. हेमंत कुमार ने कहा कि परिवार और समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा, अधिकारों की जानकारी और कर्तव्य बोध से ही महिलाएं सशक्त बनती हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज भी समाज में कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथा मौजूद है, जो एक आसुरी प्रवृत्ति है। यदि यह स्थिति बनी रही तो हम न तो विकसित राष्ट्र बन पाएंगे और न ही एक सभ्य समाज का निर्माण कर सकेंगे। उन्होंने एनएसएस स्वयंसेवकों से समाज में जागरूकता फैलाने और यह संदेश देने का आह्वान किया कि बालक और बालिका समान हैं तथा बेटा-बेटी में भेदभाव समाज के पतन का कारण बनता है।
प्रो. विद्यानंद यादव ने अपने संबोधन में बताया कि बालिकाओं को घरेलू हिंसा, बाल विवाह, दहेज जैसी कुप्रथाओं से बचाने तथा उन्हें शिक्षा और समानता का अधिकार दिलाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2008 में इसकी घोषणा की गई और वर्ष 2009 से प्रत्येक वर्ष 24 जनवरी को यह दिवस मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि 24 जनवरी 1966 को देश को पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मिली थीं, इसी ऐतिहासिक महत्व के कारण इस तिथि को राष्ट्रीय बालिका दिवस के रूप में चुना गया।
उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र का विकास वहां के बालक-बालिकाओं की शिक्षा, समान अधिकार और समुचित विकास पर निर्भर करता है। देश में वर्ष 1961 से लगातार बालिका लिंगानुपात में गिरावट एक गंभीर चिंता का विषय है। वर्ष 1991 में जहां 1000 लड़कों पर 945 लड़कियां थीं, वहीं 2001 में यह संख्या 927 और 2011 में घटकर 918 रह गई। इसी स्थिति को देखते हुए वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री द्वारा “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना की शुरुआत की गई। बालिकाओं के टीकाकरण, जन्म पंजीकरण और विद्यालय नामांकन जैसी बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए धनलक्ष्मी योजना भी लागू की गई है। उन्होंने कहा कि बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और समान अधिकार सुनिश्चित किए बिना विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव नहीं है। इस वर्ष राष्ट्रीय बालिका दिवस 2026 की थीम “भविष्य की बेटियां: डिजिटल और सशक्त” रखी गई है।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक प्रो. अरुण कुमार, प्रो. तरुण कुमार सिंह, प्रो. पवन कुमार, द्वितीय इकाई की कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो. कुमारी पूनम, तृतीय इकाई के कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो. शंभू यादव सहित शिक्षकेतर कर्मचारी सुरेंद्र कुमार, भूषण कुमार, दिलीप दिवाकर, गगन कुमार, दिग्दर्शन, रंजन कुमार, प्रभात कुमार एवं अन्य उपस्थित रहे।
वहीं एनएसएस स्वयंसेवकों में आस्था कुमारी, सिमरन गोयल, मिनटी कुमारी, साक्षी कुमारी, दिव्या कुमारी, मुस्कान कुमारी, सरिता कुमारी, शबनम कुमारी, जुली कुमारी, प्रियांशु कुमारी, रानी कुमारी, काजल कुमारी, मनीषा कुमारी, सुमन कुमारी, रोशन राज, सौम्या कुमारी, कोमल कुमारी, प्रियंका कुमारी, सोनी कुमारी, खुशबू कुमारी, अनुप्रिया कुमारी, रूबी कुमारी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

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