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पेंशनरों की बैठक में लंबित मांगों पर सरकार के खिलाफ जताया आक्रोश



सुपौल। बिहार पेंशनर समाज जिला शाखा की एक महत्वपूर्ण बैठक  बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ भवन के सभागार में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला सभापति सत्यनारायण चौधरी ने की।

बैठक में वक्ताओं ने केंद्र एवं राज्य सरकार पर वर्षों से पेंशनरों की मूलभूत एवं संवैधानिक मांगों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। नेताओं ने सरकार को कर्मचारी, पदाधिकारी एवं पेंशनर विरोधी बताते हुए दोहरे चरित्र का आरोप भी लगाया।

वक्ताओं ने कहा कि पेंशनर अपने जीवन का बड़ा हिस्सा देश और राज्य की सेवा में समर्पित कर देते हैं, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पेंशनरों की कई मांगें वर्षों से लंबित हैं, लेकिन अब तक एक भी मांग पूरी नहीं हो सकी है, जिससे पेंशनरों में भारी आक्रोश है।

बैठक में सरकार को चेतावनी दी गई कि पेंशनरों की लंबित मांगों को शीघ्र पूरा किया जाए। प्रमुख मांगों में कोरोना काल में काटी गई महंगाई भत्ते की तीन किस्तों का भुगतान, वरिष्ठ नागरिकों को रेल, बस एवं हवाई यात्रा में मिलने वाली 50 प्रतिशत छूट की बहाली, 80 वर्ष की आयु पर 20 प्रतिशत पेंशन बढ़ोतरी की व्यवस्था समाप्त कर हर पांच वर्ष पर 5 प्रतिशत बढ़ोतरी लागू करने, आयुष्मान कार्ड की पात्रता आयु 70 से घटाकर 60 वर्ष करने तथा पुरानी पेंशन योजना को लागू करने की मांग शामिल है।

इसके अलावा बैठक में सांसदों और विधायकों को दी जा रही एक से अधिक पेंशन को बंद करने की भी मांग उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद पुरानी पेंशन योजना लागू नहीं करना संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है।

पेंशनर समाज ने जिला प्रशासन से सुपौल में संगठन के लिए कार्यालय, सभा और ठहरने हेतु भूखंड या खाली सरकारी भवन आवंटित करने की मांग भी की। साथ ही जिन प्रखंडों और अनुमंडलों में संगठन का गठन नहीं हुआ है, वहां शीघ्र कमेटी बनाने का निर्णय लिया गया।

बैठक में जिला सचिव माधव प्रसाद सिंह, सीताराम यादव, किशोर कुमार पाठक, विन्देश्वरी प्रसाद यादव, सुनील कुमार सिंह, नारायण ऋषिदेव, नारायण पौद्दार, खगेश्वर यादव, केडी सिंह, शिवनारायण पासवान, मो. जियाउल्लाह, देवेंद्र केशरी, गंगा चौधरी, परमेश्वरी पासवान, लीलाधर झा, रामचंद्र झा (फौजी), राजेंद्र महतो, कुमदानंद मंडल एवं कृष्णकांत झा सहित कई सदस्य उपस्थित थे।

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