सुपौल। वीरपुर स्थित ललित नारायण स्मारक महाविद्यालय में बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की सांकेतिक कलमबंद हड़ताल गुरुवार को दूसरे दिन भी जारी रही। हड़ताल के कारण महाविद्यालय के प्रशासनिक कार्य पूरी तरह प्रभावित रहे, जबकि छात्र-छात्राओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
हड़ताल के चलते नामांकन, प्रमाण पत्र निर्गत करने, कार्यालयी प्रक्रिया सहित अन्य जरूरी कार्य बाधित रहे। कॉलेज परिसर में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा और विभिन्न कार्यों से पहुंचे छात्र-छात्राएं इधर-उधर भटकते नजर आए। शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ के राज्य कार्यकारिणी सदस्य सह इकाई संघ के सचिव बीरेन्द्र ठाकुर ने बताया कि महासंघ के आह्वान पर राज्य के सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के कर्मचारी 6 मई से कलमबंद हड़ताल पर हैं।
उन्होंने कहा कि आंदोलन की प्रमुख मांगों में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप वेतन सुधार लागू करना, पुरानी पेंशन योजना को पुनः बहाल करना, शिक्षकों की तर्ज पर कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करना तथा चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों के वेतन संशोधन सहित 15 सूत्री मांगें शामिल हैं।
बीरेन्द्र ठाकुर ने कहा कि कर्मचारियों की हड़ताल कोई शौक नहीं, बल्कि मजबूरी है। सरकार द्वारा लगातार मांगों की अनदेखी किए जाने के कारण कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हड़ताल से छात्र-छात्राओं को हो रही परेशानी का एहसास है, लेकिन यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक पहल नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
हड़ताल के दौरान महाविद्यालय परिसर में कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन भी किया। इस अवसर पर दीपक झा, नीलम देवी, राजेश सिंह, जयशंकर श्रीवास्तव, मो. अलीम, मिन्टू देवी, पंकज कुमार, ललन भिंडवार, सत्यनारायण मुखिया सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। कर्मचारियों ने सरकार से शीघ्र वार्ता कर मांगों का समाधान निकालने की मांग की, ताकि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था सामान्य हो सके।

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