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अधिवक्ताओं को मिले ₹5 लाख तक कैशलेस स्वास्थ्य बीमा: सुपौल से उठी मांग

 



मुख्यमंत्री, विधि मंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन; आश्रित परिवारों को भी योजना में शामिल करने का आग्रह

सुपौल। बिहार के अधिवक्ताओं और उनके आश्रित परिवारों के लिए प्रतिवर्ष ₹5 लाख तक की कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने की मांग उठी है। जिला विधिज्ञ संघ, सुपौल के अधिवक्ता रुद्र प्रताप लाल ने इस संबंध में मुख्यमंत्री, विधि मंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन देकर स्वास्थ्य सुरक्षा की व्यवस्था करने का आग्रह किया है।

7 अक्टूबर 2026 के ज्ञापन में उन्होंने कहा कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था के संचालन और नागरिकों के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद गंभीर बीमारी या आकस्मिक चिकित्सा की जरूरत पड़ने पर कई अधिवक्ताओं और उनके परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

सक्रिय अधिवक्ताओं और आश्रित परिवारों को मिले लाभ

ज्ञापन में बिहार स्टेट बार काउंसिल में पंजीकृत तथा सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (COP) धारक सक्रिय अधिवक्ताओं और उनके आश्रित परिवारों को ₹5 लाख तक की वार्षिक कैशलेस चिकित्सा बीमा योजना में शामिल करने की मांग की गई है। उत्तर प्रदेश की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए बिहार में भी इसी प्रकार की सुविधा लागू करने का आग्रह किया गया है।

अस्पतालों में इलाज और डिजिटल हेल्थ कार्ड की मांग

अधिवक्ता रुद्र प्रताप लाल ने राज्य के प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों और सूचीबद्ध प्रतिष्ठित निजी अस्पतालों में योजना के तहत उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही बिहार स्टेट बार काउंसिल तथा जिला एवं अनुमंडल बार एसोसिएशनों के माध्यम से पात्र अधिवक्ताओं का सत्यापन कर डिजिटल हेल्थ कार्ड जारी करने का सुझाव दिया है।

ज्ञापन में गंभीर बीमारियों के इलाज और असामयिक निधन की स्थिति में अधिवक्ता कल्याण कोष से मिलने वाली सहायता राशि बढ़ाने का भी अनुरोध किया गया है।

उन्होंने सरकार से इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सुरक्षा मिलने से अधिवक्ताओं के परिवारों को आर्थिक संबल मिलेगा और वे अधिक निश्चिंत होकर न्यायिक कार्य कर सकेंगे।


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