सुपौल। बिहार राज्य दफादार चौकीदार पंचायत संघ के प्रतिनिधियों ने दफादार चौकीदारों के आश्रितों की बहाली की प्रक्रिया को पुनः शुरू करने की मांग को लेकर बिहार सरकार से गुहार लगाई है। संघ का कहना है कि इससे ग्रामीण स्तर पर चौकीदारी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।
इस क्रम में संघ के सदस्यों ने पिपरा विधायक रामविलास कामत को एक आवेदन सौंपते हुए उनसे बिहार विधानसभा में इस गंभीर मुद्दे को उठाने की अपील की। दिए गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि दफादार चौकीदारों की व्यवस्था अंग्रेजी शासनकाल से ही पुस्तैनी रही है। उस समय इसका उद्देश्य यह था कि चौकीदारों को अपराधियों के बीच रहकर कार्य करना पड़ता था और सेवानिवृत्ति के बाद उनकी हत्या की आशंका बनी रहती थी। ऐसे में यदि चौकीदारी उसी परिवार में बनी रहती थी, तो अपराधियों में भय बना रहता था।
संघ के अनुसार वर्ष 1990 में दफादार चौकीदारों के सरकारीकरण के बाद पुस्तैनी बहाली को लेकर समस्या उत्पन्न हुई। इस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने पद्मश्री रामविलास पासवान के प्रयास से वर्ष 1995 में नियम बनवाया, जिसके तहत 01 जनवरी 1990 के बाद सेवानिवृत्त दफादार चौकीदारों के आश्रितों को नियमों में शिथिलता देते हुए रिक्त पदों पर बहाल किया गया। यह व्यवस्था वर्ष 2004 तक प्रभावी रही।
हालांकि, राजकुमार गुप्ता बनाम बिहार सरकार मामले में पटना उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रामविलास पासवान के सहयोग से बिहार चौकीदार संवर्ग नियमावली 2014 लागू की, जिसके तहत दफादार चौकीदारों के आश्रितों की बहाली पुनः शुरू की गई। यह प्रक्रिया लगभग नौ वर्षों तक चलती रही।
संघ ने बताया कि देवमुनि पासवान बनाम बिहार सरकार मामले में 25 फरवरी 2023 को पटना उच्च न्यायालय के फैसले के बाद आश्रितों की बहाली की यह व्यवस्था पुनः समाप्त कर दी गई, जिससे दफादार चौकीदार परिवारों में निराशा का माहौल व्याप्त है।
संघ के प्रतिनिधियों ने आशा जताई कि आगामी बिहार विधानसभा सत्र में राज्य सरकार इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लेकर दफादार चौकीदारों के आश्रितों की पुनः बहाली का मार्ग प्रशस्त करेगी।
इस अवसर पर संघ के कार्यकारी अध्यक्ष जेता जहां उर्फ जीतू सिंह, कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार सहित बड़ी संख्या में दफादार-चौकीदार उपस्थित थे।

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