सुपौल। जिले में चल रही प्रमुख विकास योजनाओं की प्रगति को लेकर बुधवार को उप विकास आयुक्त सारा अशरफ की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, मनरेगा योजना एवं लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
इस दौरान निदेशक एनईपी, निदेशक लेखा प्रशासन, डीआरडीए, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (मनरेगा) सहित सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, कार्यक्रम पदाधिकारी (मनरेगा) एवं स्वच्छता समन्वयक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े रहे।
समीक्षा के दौरान पाया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत प्रथम किस्त के विरुद्ध प्लिंथ निर्माण तथा द्वितीय किस्त के विरुद्ध छत स्तर तक निर्माण में छातापुर प्रखंड को छोड़ अन्य सभी प्रखंडों की प्रगति संतोषजनक नहीं है। इस पर नाराजगी जताते हुए उप विकास आयुक्त ने सभी बीडीओ को लाभुकों से समन्वय स्थापित कर कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। साथ ही एक सप्ताह के भीतर जॉब कार्ड सत्यापन एवं लंबित आवास ऐप सर्वे कार्य पूरा करने को कहा गया।
लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत यूजर चार्ज हेतु परिवारों के निबंधन में छातापुर, निर्मली एवं पिपरा प्रखंड की स्थिति खराब पाई गई। संबंधित समन्वयकों से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा किशनपुर, मरौना, पिपरा, सरायगढ़, राघोपुर, बसंतपुर एवं छातापुर में सीएससी निर्माण कार्य लंबित पाए जाने पर उसे शीघ्र पूर्ण कराने और निर्माण की फोटो स्वच्छता ग्रुप में अपलोड करने को कहा गया।
वहीं सुपौल, छातापुर, त्रिवेणीगंज, पिपरा एवं सरायगढ़-भपटियाही के एक-एक पंचायत में धूसर जल प्रबंधन के लिए जमीन चिन्हित कर अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने का भी निर्देश दिया गया। मनरेगा योजना की समीक्षा के दौरान जॉब कार्डधारियों के ई-केवाईसी कार्य को 31 मार्च 2026 तक हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया गया। इसके लिए वार्ड स्तर पर पंचायत रोजगार सेवक, बीएफटी एवं मेट की प्रतिनियुक्ति करने को कहा गया।
साथ ही जियो मनरेगा के तहत सभी योजनाओं का ड्यूरिंग एवं आफ्टर जियो टैगिंग कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। अपूर्ण योजनाओं को लेकर कनीय अभियंता एवं पंचायत तकनीकी सहायकों को स्थल निरीक्षण कर कार्य जल्द पूरा कराने एवं रिपोर्ट जिला को उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया। बैठक में उप विकास आयुक्त ने सभी पदाधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाते हुए निर्धारित समयसीमा के भीतर लक्ष्य हासिल करने पर विशेष जोर दिया।

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