सुपौल। शिक्षा, सेवा और सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य से जिले में शुरू हुआ ‘Hope Bridge’ एनजीओ युवाओं की सकारात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल बनकर उभर रहा है। संस्था का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता करना है।
‘Hope Bridge’ की खास बात यह है कि संस्था से जुड़े अधिकांश सदस्य युवा और छात्र हैं, जो अपनी पढ़ाई के साथ-साथ समाजसेवा के लिए भी समय निकाल रहे हैं। संस्था के सदस्य नियमित रूप से जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने के साथ उन्हें बेहतर भविष्य के लिए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
संस्था के संस्थापक एवं सक्रिय सदस्यों में अमर, अनिल, आलोक, कुलदीप, मनीष, शिवम, श्रवण, सोनू, उज्जवल, शिवानी, सारिका, जया और साक्षी सहित कई युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। युवाओं का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को समाजसेवा से जोड़ना और शिक्षा के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।
शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के अलावा संस्था द्वारा समय-समय पर जरूरतमंद लोगों के बीच भोजन एवं आवश्यक सामग्री का वितरण भी किया जाता है। हाल ही में संस्था से जुड़े एक सदस्य के जन्मदिन के अवसर पर बच्चों के बीच भोजन का वितरण किया गया। इस दौरान बच्चों के साथ खुशियां साझा की गईं।
संस्था से जुड़े युवाओं का कहना है कि खुशियां तभी अधिक सार्थक होती हैं, जब उन्हें जरूरतमंद लोगों के साथ बांटा जाए। इसी सोच के साथ संस्था सेवा कार्यों को लगातार आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
‘Hope Bridge’ का संकल्प है कि आर्थिक अभाव किसी भी बच्चे की शिक्षा की राह में बाधा न बने। संस्था की ओर से युवाओं को भी समाजसेवा के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि वे अपने भविष्य को संवारने के साथ समाज के भविष्य को बेहतर बनाने में भी योगदान दे सकें।
सुपौल में युवाओं की यह पहल शिक्षा, सेवा और संवेदनशीलता के जरिए सामाजिक बदलाव की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है। संस्था से जुड़े युवाओं को उम्मीद है कि आने वाले समय में अधिक लोग इस मुहिम से जुड़ेंगे और जरूरतमंद बच्चों एवं परिवारों के जीवन में बदलाव लाने में सहयोग करेंगे।

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