सुपौल। पिपरा प्रखंड के निर्मली पंचायत स्थित मनरेगा भवन परिसर में रविवार को क्रिएशन वेलफेयर सोसाइटी एवं द इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT) के संयुक्त तत्वावधान में सूरजमुखी की अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन (FRD) कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की गई। यह पहल सुपौल जिले में कृषि के नए विकल्प को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
कार्यक्रम के तहत जिले में 500 हेक्टेयर भूमि पर सूरजमुखी की बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे किसानों को धान कटाई के बाद खाली पड़ी जमीन का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिलेगा। सूरजमुखी को कम लागत, कम सिंचाई की आवश्यकता और बेहतर बाजार मूल्य वाली फसल माना जाता है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ने की उम्मीद है।
कार्यक्रम में ICRISAT के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रणधीर सिंह, समीउल इस्लाम, तथा क्रिएशन वेलफेयर सोसाइटी के सफदर तौक़ीर, आशीष झा और बृजेश कुमार उपस्थित रहे। विशेषज्ञों ने किसानों के साथ जागरूकता सत्र आयोजित कर सूरजमुखी की आधुनिक खेती तकनीक, फसल प्रबंधन और इससे होने वाले आर्थिक लाभों पर विस्तृत चर्चा की।
वैज्ञानिकों की उपस्थिति में खेतों में बुवाई की शुरुआत भी की गई, जिससे किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। टीम ने बताया कि राइस फॉलो क्षेत्रों में सूरजमुखी की खेती से किसान कम लागत में उच्च लाभ प्राप्त कर सकते हैं तथा भारत के तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में भी यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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