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Supaul : राष्ट्रीय लोक अदालत में सुपौल न्यायमंडल ने दिखाई शानदार सफलता: 1582 मामलों का निपटारा, 3.64 करोड़ रुपये का समझौता

 


विधिक संवाददाता

सुपौल (14 मार्च 2026) । राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर सुपौल न्यायमंडल में शानदार परिणाम सामने आए हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित इस लोक अदालत में कुल 1582 मामलों का निपटारा सुलह-समझौते के आधार पर किया गया, जिसमें कुल समझौता राशि 3 करोड़ 64 लाख 38 हजार 240 रुपये रही। यह लोक अदालत पक्षकारों के लिए न्याय की सुलभ और त्वरित व्यवस्था साबित हुई।

बताते चलें कि सुपौल व्यवहार न्यायालय में 10 बेंचों तथा अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय वीरपुर में 3 बेंचों का गठन किया गया था। कुल 13 बेंचों के माध्यम से मामलों का निस्तारण किया गया। पक्षकारों की सुविधा के लिए सुपौल में 2 तथा वीरपुर में 2, कुल 4 हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए थे, जिन्होंने लोगों को सहयोग प्रदान किया।



प्री-लिटिगेशन मामलों में उल्लेखनीय सफलता

प्री-लिटिगेशन (कोर्ट में दाखिल होने से पूर्व के) मामलों में कुल 15,732 वादों में से 1,124 का निपटारा हुआ। इनमें टेलीफोन, बैंक, वित्तीय संस्थान, ट्रैफिक चालान, वैवाहिक विवाद, BNSS की धारा 126, महिला हेल्पलाइन तथा अन्य श्रेणियों के मामले शामिल थे। इन मामलों में कुल समझौता राशि 2 करोड़ 92 लाख 58 हजार 240 रुपये रही।

पोस्ट-लिटिगेशन मामलों का निस्तारण 

पोस्ट-लिटिगेशन (कोर्ट में लंबित) मामलों में कुल 2,690 वादों में से 458 का निपटारा किया गया, जिसमें समझौता राशि 71 लाख 80 हजार रुपये रही। इस प्रकार प्री और पोस्ट-लिटिगेशन मिलाकर कुल 1,582 मामलों का निपटारा हुआ।



विभागवार समझौता राशि

·       मोटर दुर्घटना दावा: 7 मामलों में 65 लाख रुपये 

·       बैंक संबंधित मामले: 581 मामलों में 2 करोड़ 83 लाख 2 हजार 184 रुपये 

·       वित्तीय संस्थान: 25 मामलों में 4 लाख 600 रुपये 

·       विद्युत अधिनियम के तहत: 106 मामलों में 4 लाख 14 हजार रुपये 

·       ट्रैफिक चालान: 36 मामलों में 86 हजार रुपये 

ट्रैफिक चालान तथा वित्तीय संस्थानों से संबंधित पक्षकारों ने विशेष उत्साह दिखाया और बढ़-चढ़कर भाग लेकर अपने मामलों का खुशी-खुशी निपटारा कराया।

जिला जज एवं अन्य न्यायिक अधिकारियों ने लोक अदालत को न्याय की सुलभ पहुंच बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था लोगों को अदालती खर्च और समय से बचाती है। जिला पदाधिकारी सावन कुमार ने भी अधिक से अधिक मामलों के समाधान पर जोर दिया।

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