सुपौल। ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन के लिए चलाए जा रहे सर्वेक्षण के दौरान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। जिले के सुपौल उच्च माध्यमिक विद्यालय से वर्ष 1921 ई० की एक हस्तलिखित लॉग बुक प्राप्त हुई है, जो लगभग 100 वर्ष पूर्व विद्यालय की दैनिक गतिविधियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करती है।
यह दुर्लभ पांडुलिपि न केवल विद्यालय के गौरवशाली इतिहास को दर्शाती है, बल्कि सुपौल जिले की समृद्ध शैक्षणिक विरासत का भी एक महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जा रही है। इस खोज को शिक्षा और इतिहास के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जिले में अभी भी सैकड़ों की संख्या में ऐसी हस्तलिखित पांडुलिपियां विभिन्न संस्थानों, विद्वानों, आचार्यों, गैर-सरकारी संगठनों, मठ-मंदिरों एवं मस्जिदों में सुरक्षित रूप से संरक्षित हैं। इन ऐतिहासिक दस्तावेजों को सामने लाने और डिजिटल रूप में संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।
जिला प्रशासन ने इस दिशा में आम लोगों से सहयोग की अपील की है। विद्वानों, जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों, शिक्षकों, समाजसेवियों, छात्र-छात्राओं एवं आम नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे अपने पास उपलब्ध या जानकारी में मौजूद ऐसी पांडुलिपियों एवं दस्तावेजों के संरक्षण और डिजिटाइजेशन में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
साथ ही, इस अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को जिला स्तर पर सम्मानित किए जाने की भी घोषणा की गई है।
यह पहल न केवल अतीत की धरोहर को सहेजने का प्रयास है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान के अमूल्य भंडार को सुरक्षित रखने की दिशा में एक सराहनीय कदम भी है।



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