सुपौल। खरीफ फसल की सिंचाई व्यवस्था बहाल कराने की मांग को लेकर बसंतपुर प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों किसानों ने मंगलवार को कौशिकी भवन स्थित सिंचाई प्रमंडल, वीरपुर पहुंचकर कार्यपालक अभियंता के नाम ज्ञापन सौंपा। कार्यपालक अभियंता के कार्यालय में अनुपस्थित रहने पर किसानों ने प्रधान सहायक को आवेदन सौंपा। साथ ही जल संसाधन विभाग के वरीय अधिकारियों को भी ई-मेल के माध्यम से ज्ञापन भेजकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में किसानों ने कहा कि फूलकाहा, शिवनगर एवं राजपुर वितरणी नहरों में लंबे समय से पानी नहीं छोड़े जाने के कारण खरीफ फसल की खेती प्रभावित हो रही है। किसानों ने तत्काल नहरों में पानी बहाल करने की मांग करते हुए कहा कि समय पर सिंचाई की व्यवस्था नहीं होने पर धान की खेती गंभीर संकट में पड़ जाएगी।
किसान रामजी प्रसाद साह ने बताया कि रबी मौसम में आंधी, तूफान और ओलावृष्टि से किसानों को भारी नुकसान हुआ था। अब किसानों की उम्मीदें खरीफ फसल पर टिकी हैं। उन्होंने कहा कि महंगे हाइब्रिड धान का बिचड़ा तैयार कर लिया गया है, जिसकी रोपाई जुलाई के पहले और दूसरे सप्ताह में की जानी है। ऐसे में नहरों में शीघ्र पानी छोड़ा जाना अत्यंत आवश्यक है।
किसानों का कहना है कि कोसी-मेची लिंक परियोजना के कारण रबी सीजन में उन्होंने पानी की मांग नहीं की थी। उन्होंने बताया कि संबंधित शाखा नहरों का निकास पूर्वी कोसी मुख्य नहर के 0.00 आरडी से 12.00 आरडी के बीच है तथा 12.00 आरडी पर बनी संरचना के माध्यम से नीचे के हिस्से में पानी का बहाव नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए 12.00 आरडी तक पानी छोड़े जाने से कोसी-मेची लिंक परियोजना प्रभावित नहीं होगी, जबकि जिले के कई प्रखंडों के हजारों किसानों को खरीफ फसल की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा।
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो खरीफ फसल की खेती प्रभावित होगी, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने विभाग से अविलंब सिंचाई व्यवस्था बहाल करने की मांग की।

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