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बिहार बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 को लेकर शिक्षकों का जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित, वैज्ञानिक सोच और नवाचार पर जोर



सुपौल। राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) बिहार, बिहार काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी, पटना तथा साइंस फॉर सोसाइटी, बिहार (जिला शाखा सुपौल) के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को स्थानीय इंजीनियरिंग कॉलेज, सुपौल परिसर में बिहार बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के लिए शिक्षकों का जिला स्तरीय प्रशिक्षण सह दिशानिर्देशन कार्यशाला आयोजित की गई। इस वर्ष कार्यशाला का मुख्य विषय "निरंतरता के लिए विज्ञान एवं नवाचार (Science and Innovation for Sustainability)" रखा गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी सावन कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी संग्राम सिंह, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) आलोक शेखर आनंद, इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ए.एन. मिश्रा, जिला समन्वयक राजीव कुमार तथा शिक्षाविद् डॉ. निखिल कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। महाविद्यालय की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया।

कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद् डॉ. निखिल कुमार सिंह ने कहा कि अनुसंधान में लगन, संयम और वैज्ञानिक दृष्टिकोण सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना विकास की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य अतिथि जिलाधिकारी सावन कुमार ने कहा कि बाल विज्ञान कांग्रेस बच्चों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और शोध की भावना विकसित करने का प्रभावी मंच है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं की पहचान कर उनका वैज्ञानिक समाधान खोजने के लिए प्रेरित करें।

प्राचार्य डॉ. ए.एन. मिश्रा ने गतिविधि आधारित शिक्षण को विज्ञान शिक्षा की सफलता का आधार बताया। वहीं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी आलोक शेखर आनंद ने विज्ञान शिक्षा में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा सुदूर संवेदन तकनीक की बढ़ती उपयोगिता पर प्रकाश डाला। जिला समन्वयक राजीव कुमार ने बाल विज्ञान कांग्रेस को राज्य के प्रतिभाशाली बच्चों की वैज्ञानिक क्षमता को पहचानने और निखारने का सशक्त मंच बताया।

तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के पांच प्रमुख विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया। डॉ. विकास सिंह ने जल संरक्षण, डॉ. आशीष कुमार ने कचरा एवं अपशिष्ट प्रबंधन (R5), डॉ. चंदन कुमार ने ऊर्जा (E4), डॉ. जय कुमार ने भारतीय ज्ञान प्रणालियों के अनुप्रयोग तथा अवधेश कुमार ने भोजन, कृषि एवं स्वास्थ्य विषय पर विस्तृत जानकारी साझा की।

समापन सत्र में जिला रिसोर्स पर्सन गीता कुमारी, अवधेश कुमार एवं ई. रिंकेश कुमार ने विज्ञान आधारित परियोजनाओं एवं मॉडल निर्माण, प्रस्तुतीकरण तथा शोध प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। गीता मिश्रा ने खाद्य संसाधन प्रबंधन को वैश्विक चुनौती बताते हुए इस दिशा में नवाचार की आवश्यकता पर बल दिया। दरभंगा से आए विशेषज्ञ जितेंद्र कुमार ने शिक्षकों को परियोजना निर्माण, प्रस्तुतीकरण और केस स्टडी की बारीकियों से अवगत कराया। वहीं डॉ. सुरेंद्र यादव ने सुपौल के बाल वैज्ञानिकों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए आयोजन समिति को शुभकामनाएं दीं।

इस कार्यशाला में जिले के 125 से अधिक विद्यालयों के शिक्षकों ने भाग लिया। आयोजन के सफल संचालन में श्रवण कुमार, शंकर कुमार, संतोष कुमार, सौरभ सुमन और सोनू कुमार सहित अन्य सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने तथा स्थानीय समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान खोजने की दिशा में नई ऊर्जा मिलेगी। साथ ही सुपौल को नवाचारी विज्ञान परियोजनाओं का केंद्र बनाने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।

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