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| गौ सम्मान आह्वान अभियान के तहत आठ सूत्री मांगपत्र सौंपा |
सुपौल के जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन; 11,398 समर्थकों के हस्ताक्षर वाली पीडीएफ भी सौंपी
सुपौल। गौ सम्मान आह्वान अभियान के तहत गौ संरक्षण से संबंधित आठ सूत्री मांगों को लेकर अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों और गौप्रेमियों ने सुपौल के जिला पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। यह मांगपत्र जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, बिहार के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को प्रेषित किया गया है।
अभियान के प्रतिनिधियों ने देश में गौवंश की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए संरक्षण, चिकित्सा, आश्रय, शिक्षा और गौ आधारित अर्थव्यवस्था के विकास के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की। ज्ञापन के साथ अभियान के समर्थन में प्राप्त 11,398 हस्ताक्षरों वाली 458 पृष्ठों की पीडीएफ फाइल भी पेन ड्राइव में सौंपी गई।
मांगपत्र में शामिल आठ प्रमुख मांगें
1. एकीकृत केंद्रीय कानून और स्वतंत्र मंत्रालय का गठन
अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों ने संविधान के अनुच्छेद 48 का उल्लेख करते हुए पूरे देश के लिए एक समान “केंद्रीय गौवंश संरक्षण अधिनियम” बनाने की मांग की। इसके साथ ही गौवधशालाओं के लाइसेंस निरस्त करने, अवैध कसाईखानों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने तथा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्वतंत्र केंद्रीय गौ सेवा मंत्रालय और विशेष कार्यबल गठित करने का आग्रह किया गया।
2. देशी गौवंश को संवैधानिक मान्यता
मांगपत्र में देशी गौवंश को “राष्ट्रमाता” अथवा “राष्ट्र आराध्या” के रूप में संवैधानिक मान्यता देकर विशेष राष्ट्रीय संरक्षण प्रदान करने की मांग की गई।
3. गौ तस्करी और गौवध के विरुद्ध कठोर दंड
प्रतिनिधियों ने गौ तस्करी और गौवध को संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखने की मांग की। साथ ही ऐसे अपराधों में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के लिए आजीवन कारावास और उनकी संपत्ति कुर्क करने जैसे कठोर कानूनी प्रावधान करने का आग्रह किया।
4. गौ आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
ज्ञापन में पंचगव्य से संबंधित अनुसंधान को प्रोत्साहित करने तथा गौ आधारित जैविक खाद, कीटनाशक और स्वास्थ्य उत्पादों को सरकारी खरीद व्यवस्था से जोड़ने की मांग की गई। इसके अतिरिक्त विद्यालयों के मध्याह्न भोजन और मंदिरों के प्रसाद में देशी गाय के दूध एवं घी के उपयोग को बढ़ावा देने का आग्रह किया गया।
5. प्रत्येक पंचायत में नंदीशाला की स्थापना
अभियान ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में नंदीशाला तथा हर जिले में कम-से-कम एक आदर्श गौ अभयारण्य और वृहद गौशाला स्थापित करने की मांग की, ताकि निराश्रित गौवंश को सुरक्षित और सम्मानजनक आश्रय मिल सके।
6. राजमार्गों पर एम्बुलेंस और ट्रॉमा सेंटर
राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रत्येक 50 से 100 किलोमीटर की दूरी पर सुसज्जित गौ-वाहिनी एम्बुलेंस तथा 150 से 200 किलोमीटर के दायरे में आधुनिक ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्था करने की मांग की गई। प्रतिनिधियों के अनुसार इससे सड़क दुर्घटनाओं में घायल गौवंश को समय पर उपचार मिल सकेगा।
7. स्कूली पाठ्यक्रम में गौ-विज्ञान
मांगपत्र में गौवंश के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक, औषधीय और आर्थिक महत्त्व से नई पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से स्कूली पाठ्यक्रमों में गौ-विज्ञान से संबंधित विषयवस्तु शामिल करने की मांग की गई।
8. चारा सुरक्षा और गौचर संरक्षण नीति
प्रतिनिधियों ने एक सुदृढ़ “चारा सुरक्षा कानून” बनाने की मांग की। इसके तहत चारे के औद्योगिक उपयोग को नियंत्रित करने, अवैध भंडारण और अनियंत्रित मूल्य वृद्धि रोकने तथा गौचर भूमि के संरक्षण एवं विकास के लिए गौचर विकास बोर्ड गठित करने का आग्रह किया गया।
अभियान में कई गौप्रेमी रहे उपस्थित
मांगपत्र सौंपने वालों में गौ संरक्षण अभियान के जिला प्रभारी नलिन जायसवाल, संभाग प्रभारी संतोष कुमार सुधांशु, अशोक सम्राट, श्रवण चौधरी, चंद्रशेखर झा, रमन शरण दास, रूबी जायसवाल, मोहन जायसवाल, राधेश्याम साहू, नंदिनी कुमारी, मुन्नी देवी, पिंकी देवी और मंजूषा कुमारी सहित कई गौप्रेमी शामिल रहे।
अभियान के प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि केंद्र और राज्य सरकार उनकी मांगों पर विचार करते हुए गौवंश के संरक्षण, उपचार और पुनर्वास के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाएंगी।

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