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मानव तस्करी विरोध दिवस पर सुपौल में जागरूकता कार्यक्रम आज, भारत-नेपाल सीमा पर रोकथाम पर होगा मंथन

 

सुपौल। मानव तस्करी, बाल श्रम, महिलाओं एवं बच्चों के शोषण तथा असुरक्षित प्रवासन के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 30 जुलाई को मानव तस्करी विरोध दिवस के अवसर पर सुपौल में विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम कोशी प्रहरी, सुपौल द्वारा मानव सेवा संस्थान, गोरखपुर के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम का आयोजन हजारी उच्च माध्यमिक विद्यालय, गौरवगढ़ (सुपौल) में सुबह 11 बजे होगा। इसका मुख्य उद्देश्य भारत-नेपाल सीमा से सटे क्षेत्र में मानव तस्करी, बाल श्रम, महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध हिंसा तथा विभिन्न प्रकार के शोषण की रोकथाम के लिए समाज, प्रशासन और सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय को मजबूत करना है।

आयोजन में बाल कल्याण समिति (CWC), जिला प्रोबेशन विभाग, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं को मानव तस्करी के कारणों, उसकी पहचान, बचाव के उपायों, पीड़ितों के पुनर्वास और उपलब्ध कानूनी सहायता संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी।

आयोजकों ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा से सटे होने के कारण सुपौल मानव तस्करी की दृष्टि से संवेदनशील जिला माना जाता है। ऐसे में इस गंभीर सामाजिक समस्या पर प्रभावी नियंत्रण के लिए स्कूलों, प्रशासन, पुलिस, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

कोशी प्रहरी से जुड़े रामचंद्र यादव एवं प्रमोद यादव ने सभी सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, छात्र-छात्राओं और पत्रकारों से कार्यक्रम में शामिल होकर मानव तस्करी के विरुद्ध जनजागरूकता अभियान को सफल बनाने की अपील की है।

जनजागरूकता पर रहेगा विशेष फोकस

कार्यक्रम में मानव तस्करी, बाल श्रम, महिला एवं बाल शोषण की रोकथाम, सुरक्षित प्रवासन और पीड़ितों के अधिकारों पर विशेष चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता ही मानव तस्करी जैसी गंभीर समस्या से निपटने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

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