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आंगनबाड़ी केंद्रों का डीडीसी ने किया औचक निरीक्षण, बच्चों को पढ़ाया ककहरा और पहाड़ा




सुपौल। समेकित बाल विकास परियोजना के तहत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं एवं सेवाओं की गुणवत्ता का जायजा लेने के लिए शनिवार को उप विकास आयुक्त इंद्रवीर कुमार ने सुपौल प्रखंड के बसबिट्टी, चकडुमरिया सहित विभिन्न स्थलों पर स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त ने आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन, बच्चों की उपस्थिति, भोजन, साफ-सफाई एवं अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने स्थानीय लोगों से बातचीत कर केंद्रों के संचालन से संबंधित जानकारी भी प्राप्त की।

डीडीसी ने आंगनबाड़ी केंद्र की सेविकाओं को निर्देश दिया कि बच्चों को निर्धारित ड्रेस में केंद्र पर आने के लिए प्रेरित करें तथा निर्धारित मेन्यू के अनुसार उन्हें पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने केंद्र परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया।

उप विकास आयुक्त ने बच्चों को दी जा रही स्कूल पूर्व शिक्षा एवं प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल की गुणवत्ता का भी जायजा लिया। उन्होंने केंद्र पर मौजूद बच्चों से एक-एक कर बातचीत की और उनकी शैक्षणिक गतिविधियों के संबंध में जानकारी ली।

इस दौरान डीडीसी ने बच्चों को ककहरा और पहाड़ा पढ़ाया तथा सामान्य ज्ञान से जुड़े सवाल पूछे। बच्चों की ओर से दिए गए जवाबों के माध्यम से उन्होंने उनकी सीखने की क्षमता और केंद्र में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों का अवलोकन किया।

चक डुमरिया स्थित आंगनबाड़ी केंद्र के निरीक्षण के दौरान जानकारी मिली कि केंद्र का नवनिर्मित भवन बनकर तैयार है, लेकिन अभी तक हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इस पर उप विकास आयुक्त ने नवनिर्मित भवन का निरीक्षण किया तथा संबंधित पदाधिकारियों से दूरभाष के माध्यम से जानकारी ली।

उन्होंने सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण कर सोमवार से किराए के भवन के स्थान पर नवनिर्मित आंगनबाड़ी केंद्र भवन में ही संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान उप विकास आयुक्त ने आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित करने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों के हित में स्थानीय लोग आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए उदारतापूर्वक भूमि दान करें, ताकि गांव के बच्चों को उनके घर के समीप बेहतर वातावरण में स्कूल पूर्व शिक्षा एवं प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल की सुविधा उपलब्ध हो सके।

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