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घूरन पंचायत में कोसी का भीषण कटाव, ग्रामीणों ने दिया धरना



सुपौल। सुपौल सदर प्रखंड की घूरन पंचायत में कोसी नदी के तेज बहाव से जारी भीषण कटाव ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। नदी किनारे लगातार हो रहे कटाव से कई घर खतरे की जद में आ गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते कटावरोधी कार्य शुरू नहीं हुआ तो बड़ी संख्या में परिवार बेघर हो सकते हैं।

कटाव की गंभीर स्थिति को लेकर कांग्रेस नेता एवं सुपौल विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी मिन्नत रहमानी के नेतृत्व में मंगलवार को घूरन पंचायत में एक दिवसीय धरना दिया गया। धरना के माध्यम से प्रशासन से युद्धस्तर पर कटावरोधी कार्य शुरू कराने की मांग की गई।

धरना के बाद मीडिया से बातचीत में मिन्नत रहमानी ने कहा कि कोसी क्षेत्र में प्रत्येक वर्ष बाढ़ और कटाव से भारी तबाही होती है। सरकार की ओर से हर साल बाढ़ नियंत्रण और कटावरोधी कार्य कराने की बात कही जाती है, लेकिन इसका अपेक्षित लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि हर वर्ष सुपौल जिले के किसी न किसी गांव और पंचायत में कटाव के कारण दर्जनों से लेकर सैकड़ों घर नदी में समा जाते हैं।

उन्होंने कहा कि घूरन पंचायत सुपौल मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित है, इसके बावजूद यहां कटाव की भयावह स्थिति बनी हुई है। प्रशासन को मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगले 24 घंटे के भीतर कटाव रोकने के लिए समुचित कार्रवाई शुरू नहीं की गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा और वह आमरण अनशन पर बैठने को बाध्य होंगे। साथ ही उन्होंने बिहार सरकार से कटाव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस एवं दीर्घकालिक योजना बनाने की मांग की।

इधर, घूरन गांव के प्रभावित ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी को आवेदन देकर तत्काल कटावरोधी कार्य शुरू कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने आवेदन में बताया कि नदी के तेज और लगातार बढ़ते बहाव के कारण गांव के किनारे तेजी से कटाव हो रहा है। घरों के समीप की जमीन लगातार नदी में समाती जा रही है।

ग्रामीणों के अनुसार कई गरीब परिवारों के घर कटाव की चपेट में आ चुके हैं, जबकि अन्य घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है। समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ी संख्या में परिवार बेघर हो सकते हैं तथा जान-माल का गंभीर नुकसान होने की आशंका है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल स्थल निरीक्षण कराने और विशेषज्ञ अभियंताओं की टीम भेजकर प्रभावी कटावरोधी कार्य शुरू कराने की मांग की है। आवेदन में बोल्डर पिचिंग, जियो बैग सहित अन्य आवश्यक कटावरोधी सामग्री लगाने तथा प्रभावित परिवारों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का भी अनुरोध किया गया है।

ग्रामीणों ने कहा कि उनके लिए घर ही सबसे बड़ी संपत्ति है। यदि घर और जमीन नदी में समा गई तो उनके पास रहने के लिए सुरक्षित स्थान भी नहीं बचेगा। उन्होंने जिला प्रशासन से मानवीय आधार पर तत्काल हस्तक्षेप कर उनके घर और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है।

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