Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Classic Header

{fbt_classic_header}

Breaking News

latest

बिहार को 1 लाख करोड़ ब्याज-रहित ऋण, 2% अतिरिक्त उधार सीमा व बाढ़ राहत पैकेज की मांग, वित्त मंत्री यादव ने बजट-पूर्व परामर्श बैठक में रखी विस्तृत घोषणाएँ

प्रमोद कुमार यादव @ सुपौल टाइम्स.कॉम

नई दिल्ली (10 जनवरी 2026)। केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामन की अध्यक्षता में आज बजट-पूर्व परामर्श बैठक में बिहार सरकार की ओर से कई अहम वित्तीय और विकासात्मक अनुरोध प्रस्तुत किए गए। बिहार के वित्त मंत्री श्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति प्रदान करने के लिए विशेष पैकेज और नीतिगत सहयोग की जोरदार मांग की।


बैठक में मौजूद बिहार के वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव

श्री यादव ने अपने संबोधन की शुरुआत केंद्रीय वित्त मंत्री को आमंत्रण के लिए धन्यवाद और नववर्ष की शुभकामनाएँ देते हुए की। उन्होंने कहा कि यह परामर्श राज्यों के मुद्दों को केंद्रीय बजट में प्रभावी रूप से शामिल करने का महत्वपूर्ण मंच है।

कृषि, युवा एवं बुनियादी सुविधाओं को बढ़ावा

वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट में मखाना के लिए समर्पित बोर्ड, पश्चिमी कोशी नहर परियोजना एवं खाद्य प्रसंस्करण संस्थान जैसी घोषणाएँ बिहार के किसानों तथा युवाओं के लिए लाभप्रद हैं। उन्होंने नए स्किल इंडिया केंद्रों और टीयर-2 शहरों में स्टार्ट-अप इनक्यूबेशन सेंटरों पर सहयोग मिलने के लाभ का उल्लेख किया।

राज्य की प्रगति और ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम

उन्होंने बताया कि बिहार ने वर्ष 2024-25 में 13.09 प्रतिशत विकास दर प्राप्त कर देश के तेज़ी से बढ़ते राज्यों में स्थान बनाया है। “सात निश्चय-3” कार्यक्रम से मानव पूंजी सुदृढ़ होगी और राज्य को समतामूलक विकास मिलेगा।

केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामन की अध्यक्षता में आयोजित बजट-पूर्व परामर्श बैठक 

बजट-पूर्व केंद्रीय सरकार से प्रमुख मांगें

ब्याज-रहित दीर्घकालिक ऋण:

बिहार की पूंजीगत आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री ने वर्तमान 50,000 करोड़ रुपये की ब्याज-रहित ऋण सीमा को बढ़ाकर 1,00,000 करोड़ रुपये करने का अनुरोध किया।

उप-कर और अधिभारों का विभाज्य कोष में समावेश:

उन्होंने उप-करों और अधिभारों का बढ़ता हिस्सा राज्य के राजस्व पर प्रभाव डालने की बात उठाते हुए इसे विभाज्य कोष में शामिल करने का आग्रह किया, ताकि राज्यों को संवैधानिक हिस्से का उचित लाभ मिले।

अतिरिक्त उधार सीमा:

बिहार सरकार ने GSDP के अतिरिक्त 2 प्रतिशत उधार लेने की अनुमति देने का प्रस्ताव दिया, जो तब तक लागू रहे जब तक राज्य की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत के बराबर नहीं हो जाती।

बाढ़ राहत एवं प्रबंधन पैकेज:

नेपाल की तरफ से बहने वाली नदियों — कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला-बलान, महानंदा तथा तिलयुगा — से बार-बार हो रही बाढ़ के प्रभाव से निपटने के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी आधारित विशेष रिलीफ और डिजास्टर रिजिलिएंस पैकेज की मांग रखी गयी। पैकेज में GIS मैपिंग, उपग्रह पूर्वानुमान, रियल-टाइम मॉनिटरिंग तथा मजबूत अवसंरचना शामिल होनी चाहिए, इसके साथ ही इंटरलिंकिंग ऑफ रिवर जैसी दीर्घकालिक पहलें सुझाई गईं।

कृषि में तकनीकी उन्नयन:

कृषि एवं इससे जुड़े क्षेत्रों में AI, ड्रोन, ब्लॉकचेन जैसी नई तकनीकों को अपनाने वाली केंद्र प्रायोजित योजनाओं की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

औद्योगिक विकास:

बिहार की जल संसाधन प्रचुरता, कुशल श्रमिक उपलब्धता तथा जैव-विविधता को देखते हुए राज्य में औद्योगिक निवेश और उद्योगों की स्थापना पर सहयोग माँगा गया, ताकि रोजगार तथा आर्थिक विकास को बल मिल सके।

वित्त मंत्री श्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि आगामी केंद्रीय बजट में इन प्रस्तावों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाये, जिससे बिहार समावेशी तथा सतत विकास की दिशा में और अधिक प्रगति कर सके।

कोई टिप्पणी नहीं