सुपौल। डीडीसी सारा असरफ ने सोमवार को वीरपुर स्थित फिजिकल मॉडलिंग सेंटर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक भवन में फिजिकल मॉडलिंग सेंटर के सुप्रीटेंडिंग इंजीनियर प्रमोद भारती ने प्रोजेक्टर के माध्यम से केंद्र की आवश्यकता, उद्देश्य एवं अब तक किए गए कार्यों की विस्तृत जानकारी दी।
इस अवसर पर इंजीनियर प्रमोद भारती ने बताया कि वर्ष 2024 में कोसी बराज पर 6,61,295 क्यूसेक जलस्तर पहुंचने के कारण बराज के ऊपर से पानी ओवरटॉप हो गया था। वहीं वर्ष 2025 में भी 5,51,000 क्यूसेक जलस्तर पर ओवरटॉप की स्थिति बनी। उन्होंने बताया कि कोसी बराज के जलस्तर में कमी रहने के बावजूद अधिक सिल्ट जमाव के कारण परेशानी बढ़ जाती है। साथ ही हाल के वर्षों में कोसी नदी का बहाव पूर्व दिशा की ओर अधिक होने से पूर्वी कोसी तटबंध पर हमेशा खतरा बना रहता है।
अधिकारियों ने बताया कि कोसी नदी के बहाव से होने वाली क्षति को रोकने एवं संभावित खतरों को पहले ही समझने के उद्देश्य से फिजिकल मॉडलिंग सेंटर की स्थापना की गई है, ताकि नदी के प्रवाह का भौतिक मॉडल के माध्यम से अध्ययन कर समय रहते समाधान निकाला जा सके।
निरीक्षण के दौरान कोसी बराज की संरचना पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कार्यपालक अभियंता प्रमोद भारती ने बताया कि वर्ष 1963 में निर्मित कोसी बराज को बने लगभग 62 वर्ष हो चुके हैं। किसी भी बड़ी संरचना की औसत उपयोगिता अवधि लगभग 100 वर्ष मानी जाती है। ऐसे में भविष्य में यदि कोसी बराज को किसी अन्य स्थान पर बनाने की आवश्यकता पड़ती है, तो उसकी योजना अभी से तैयार करना आवश्यक होगा। इस दिशा में स्थल चयन सहित अन्य तकनीकी पहलुओं में फिजिकल मॉडलिंग सेंटर की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
इसके बाद डीडीसी ने अभियंताओं के साथ केंद्र के अन्य भवनों एवं मॉडल ट्रे का भी निरीक्षण किया। उन्होंने मॉडल ट्रे के भीतर बनाए गए बराहक्षेत्र से कोसी बराज, कोसी महासेतु एवं कुर्सेला तक के मॉडल का अवलोकन किया और आवश्यक जानकारी ली। साथ ही फिजिकल मॉडलिंग सेंटर परिसर में स्थित प्रयोगशाला का भी निरीक्षण कर वहां उपलब्ध मशीनों एवं उपकरणों की जानकारी प्राप्त की।
डीडीसी ने निरीक्षण के दौरान फिजिकल मॉडलिंग सेंटर के कार्यों की सराहना करते हुए इसे कोसी क्षेत्र की बाढ़ प्रबंधन और संरचनात्मक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

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