सुपौल। छातापुर प्रखंड के माधोपुर पंचायत के वार्ड संख्या तीन स्थित मदरसा जामिया आईशा लीलबनात के समीप आयोजित दो दिवसीय समाज सुधार एवं शिक्षा जागरूकता सम्मेलन का समापन गुरुवार को सामूहिक दुआ के साथ हो गया। इस अवसर पर मौलाना कासमी सहित मौजूद अकीदतमंदों ने मुल्क की सलामती, अमन और भाईचारे के लिए दुआ की। दुआ में सैकड़ों धर्मावलंबी, जनप्रतिनिधि, गणमान्य लोग एवं प्रबुद्धजन शामिल हुए।
सम्मेलन की अध्यक्षता मौलाना केरामुद्दीन एवं मौलाना मुफ्ती तबारक हुसैन कासमी ने संयुक्त रूप से की, जबकि कार्यक्रम का संचालन हाफिज मोजाहिद हसनैन हबीबी ने किया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए उलेमाओं ने कहा कि आख़िरी नबी हजरत मुहम्मद मुस्तफा (स०) सिर्फ मुसलमानों के ही नहीं बल्कि पूरी इंसानियत के लिए रहमत हैं। उन्होंने आपसी सौहार्द, भाईचारे और अमन-चैन बनाए रखने की अपील की।
वक्ताओं ने कहा कि कुरआन पूरी मानवता के लिए कानून की किताब और समाज सुधार का प्रेरक ग्रंथ है, जो अमन, शांति और बेहतर जीवन जीने का मार्ग दिखाता है। कुरआन के उसूलों पर अमल कर ही इंसान सच्चे मायनों में अच्छा इंसान बन सकता है। उलेमाओं ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के दौर में इंसानियत कमजोर होती जा रही है, जिसे मजबूत करने की आवश्यकता है।
उन्होंने बेटियों को अल्लाह की दी हुई रहमत बताते हुए कहा कि जो माता-पिता बेटियों की परवरिश कर उन्हें मुकम्मल तालीम देते हैं और उनका विवाह करते हैं, ऐसे माता-पिता को अल्लाह जन्नत में जगह देता है। वक्ताओं ने यह भी कहा कि मदरसे सिर्फ अलीम-ए-दीन ही नहीं बल्कि देश के सच्चे और जिम्मेदार नागरिक भी तैयार करते हैं।
अन्य वक्ताओं ने नशाखोरी, रिश्वतखोरी, दहेज प्रथा, हक़मारी तथा महिलाओं पर ज़ुल्म को इस्लाम के खिलाफ बताते हुए इन बुराइयों से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि गुनाह को गुनाह समझें और अल्लाह से माफी मांगने वाले बनें। पांचों वक्त की नमाज की पाबंदी, सच्चाई और नेक रास्ते पर चलने की नसीहत दी गई।
मौलाना खालिद सैफुल्लाह चतुर्वेदी ने वेद और कुरआन का उल्लेख करते हुए शिक्षा और ज्ञान को जीवन का मूलमंत्र बताया। उन्होंने कहा कि सभी धर्म अच्छाई का रास्ता दिखाते हैं, ईश्वर एक है, केवल इबादत के तरीके अलग-अलग हैं।
मौलाना मुफ्ती तबारक हुसैन कासमी ने कहा कि किसी से नफरत नहीं रखें, दूसरों की गलतियों को माफ करने वाला बनें और गलत रास्तों से तौबा करें। उन्होंने कहा कि माफी मांगना कमजोरी नहीं और माफ करना गुनाह नहीं, बल्कि यह बड़े दिल और ईश्वर की कृपा का प्रतीक है।
कार्यक्रम में शायर आफताब रहबर, मौलाना सेराज और कारी नदीम जमई ने शायरी और नात-गज़ल के माध्यम से उर्दू की खूबसूरती बिखेरी।
सम्मेलन में मुफ्ती मो. तबारक हुसैन कासमी, मुफ्ती वशी अहमद कासमी, मुफ्ती समीम अहमद कासमी, मौलाना तौहीद आलम सैफी, मौलाना अब्दुल अजीज उमरी, मौलाना फारुक नदवी, मौलाना रियाजुद्दीन कासमी, मुफ्ती मो. जावेद सहित अनेक उलेमाओं ने तकरीर की।
आयोजन को सफल बनाने में कमिटी अध्यक्ष मौलाना इस्माईल कासमी सहित अकिल अहमद, मोती अहमद, मो. मोहिबुर्रहमान, रहमत अली, मो. मुस्तफा, हाफिज शमशेर, जबीउल्लाह अंसारी, जगदीश दास, सुशील मंडल, सूर्यनारायण यादव, अरविंद शर्मा सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का सराहनीय योगदान रहा।

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