सुपौल। पिपरा थाना क्षेत्र के पथरा गांव में कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने पहुंच रही प्रशासनिक टीम को लगातार दूसरे दिन भी बैरंग लौटना पड़ा। मजिस्ट्रेट और पुलिस बल स्थल तक तो पहुंचते हैं, लेकिन आक्रोशित अतिक्रमणकारियों की भारी भीड़ और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए कार्रवाई किए बिना ही वापस लौट जाते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कोर्ट के आदेश का पालन केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया है। जब तैनात मजिस्ट्रेट से पूछा गया कि अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया जा रहा है, तो उन्होंने पर्याप्त पुलिस बल नहीं होने का हवाला दिया।
बताया जाता है कि करीब 23 परिवारों के सैकड़ों लोग पिछले लगभग 50 वर्षों से अधिक समय से उक्त स्थल पर रह रहे हैं। इनमें कई भूमिहीन गरीब परिवार, विकलांग व्यक्ति और असहाय महिलाएं शामिल हैं। कई परिवारों को वर्षों पूर्व सरकार द्वारा इंदिरा आवास योजना के तहत आवास भी मिला था। अब उनका घर अतिक्रमण की जद में है।
अतिक्रमणकारियों का कहना है कि उनके पास रहने के लिए अन्य कोई जमीन नहीं है। पहले सरकार पुनर्वास के लिए जमीन उपलब्ध कराए, उसके बाद ही वे स्थल खाली करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन जबरन बुलडोजर चलाता है तो वे आत्मदाह तक करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।
प्रशासन के पहुंचने से पहले ही सभी प्रभावित परिवार एकजुट होकर गोलबंद हो जाते हैं। बच्चे, बूढ़े, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में सड़क पर उतर आते हैं, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो जाती है।
इस संबंध में पिपरा सीओ सह तैनात मजिस्ट्रेट उमा कुमारी ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर दखल-दिहानी की कार्रवाई की जानी है, लेकिन पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध नहीं होने और स्थल पर उत्पन्न तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए फिलहाल अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका है। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की गई है और अभी दो दिनों का समय शेष है, जिसके भीतर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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