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निर्मली नगर पंचायत खुद बना अतिक्रमणकारी, मुख्य सड़क पर 3 साल से खड़ी जेसीबी बनी हादसों की वजह


सुपौल। निर्मली नगर पंचायत इन दिनों अपने ही कार्यशैली को लेकर सवालों के घेरे में है। शहर में अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी निभाने वाली नगर पंचायत खुद अतिक्रमण का उदाहरण बन गई है। नगर पंचायत कार्यालय के मुख्य द्वार पर थाना रोड जैसी व्यस्त मुख्य सड़क पर पिछले करीब तीन वर्षों से एक खराब जेसीबी खड़ी है, जिससे सड़क संकरी हो गई है और रोजाना दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस रास्ते से साइकिल, मोटरसाइकिल, चारपहिया वाहन, टेंपो, ठेला और पैदल राहगीरों का लगातार आवागमन होता है। ऐसे में सड़क पर खड़ी यह जेसीबी कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। बावजूद इसके, नगर पंचायत के अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।

अतिक्रमण हटाने वालों पर ही उठ रहे सवाल

शहर में अतिक्रमण हटाने और नो-एंट्री लागू करने की बात करने वाली नगर पंचायत की कार्यशैली पर अब लोग सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब खुद नगर पंचायत सार्वजनिक सड़क को बाधित कर रही है, तो वह दूसरों से नियम पालन की उम्मीद कैसे कर सकती है।

जलजमाव जैसी मूल समस्याएं जस की तस

शहर की सबसे बड़ी समस्या जलजमाव अब भी जस की तस बनी हुई है। लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत इन मूल समस्याओं के समाधान में विफल रही है, जबकि सरकारी राशि के दुरुपयोग और अनियमितताओं के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं।

गुटबाजी से विकास कार्य प्रभावित

नगर पंचायत के 12 वार्डों के प्रतिनिधियों के बीच गहरी मतभिन्नता भी विकास कार्यों में बाधा बन रही है। हाल ही में सशक्त कमेटी भंग होने के बाद 16 अप्रैल को नई कमेटी के गठन की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें खरीद-फरोख्त, जातिवाद और प्रलोभन जैसे आरोप भी लग रहे हैं।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इसी तरह सशक्त कमेटी का गठन होता है, तो शहर में विकास कार्य फिर से प्रभावित हो सकते हैं।

करोड़ों की मशीनें है लापता या बेकार

नगर पंचायत द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर खरीदे गए ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनों की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। एक-दो मशीनों को छोड़ दें तो बाकी मशीनें कहां हैं और किस हालत में हैं, इसकी जानकारी तक नगर पंचायत के पास नहीं है। जो एक जेसीबी मौजूद है, वह भी खराब हालत में सड़क पर खड़ी-खड़ी जंग खा रही है।

एफआईआर के बावजूद नहीं होती कार्रवाई 

कई जनप्रतिनिधियों और कर्मियों पर एफआईआर दर्ज होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लग पा रही है। लोगों का कहना है कि इससे सरकारी धन के दुरुपयोग को बढ़ावा मिल रहा है। अतिक्रमण और जाम जैसी गंभीर समस्याओं पर नगर पंचायत के अधिकारी किसी भी तरह की टिप्पणी करने से बचते नजर आ रहे हैं।

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