सुपौल। जिला मुख्यालय स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय में सहकार भारती के तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण बैठक एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सहकारिता के माध्यम से आर्थिक स्वावलंबन को बढ़ावा देना रहा। इस दौरान प्रतिभागियों को स्वरोजगार से जुड़े विभिन्न उत्पादों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहकार भारती के राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री लक्ष्मण पात्रा ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आर्थिक मजबूती लाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि छोटे-छोटे समूह बनाकर स्थानीय स्तर पर उत्पादन कार्य शुरू करने से न केवल आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को नित्य उपयोग में आने वाले उत्पाद जैसे नील, फिनाइल, हैंडवॉश, लिक्विड कपड़े धोने का घोल एवं टॉयलेट क्लीनर बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षकों ने कम लागत में गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने की विधियों की जानकारी दी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सैकड़ों लाभार्थियों ने भाग लेकर स्वरोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
प्रदेश संगठन मंत्री राजेश श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में सहकार भारती के मूल मंत्र “बिना संस्कार नहीं सहकार, बिना सहकार नहीं उद्धार” को दोहराते हुए कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का भी सशक्त आधार है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1978 में स्थापित सहकार भारती वर्तमान में देश के 27 प्रदेशों एवं 600 से अधिक जिलों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि सहकारिता भारत की सांस्कृतिक धरोहर है और यदि इसे सही दिशा में आगे बढ़ाया जाए तो यह आर्थिक विकास का प्रभावी माध्यम बन सकती है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने सहकारिता आंदोलन को और अधिक मजबूत करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर नलिन जायसवाल, पंकज कुमार, शालिन झा, डॉ. सुभाष कुमार, रविंद्र कुमार साह, मनीष श्रीवास्तव, अजय चौधरी, नीता सिन्हा, रणधीर चौधरी, नगर कार्यवाह केशव राज एवं जिला प्रचारक राहुल राज देव सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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