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सुपौल इंजीनियरिंग कॉलेज में सेमीकंडक्टर व उभरती तकनीकों पर राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू




सुपौल। अभियंत्रण महाविद्यालय सुपौल के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग द्वारा आयोजित एक सप्ताह की राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ सोमवार को महाविद्यालय परिसर में किया गया। कार्यशाला का विषय सेमीकंडक्टर डिवाइस, फोटोनिक्स एवं इंटेलिजेंट ऑटोमेशन जैसे उभरते तकनीकी क्षेत्रों पर आधारित है। इस कार्यशाला में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिए जा रहे हैं, जिससे प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी मिल रही है।

कार्यक्रम का उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अच्युतानंद मिश्रा ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में सेमीकंडक्टर तकनीक आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल प्रणाली की आधारशिला बन चुकी है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को नई तकनीकों को समझने और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।

कार्यशाला के संयोजक एवं डीन एकेडेमिक्स डॉ. चन्दन कुमार ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि एक सप्ताह तक चलने वाले इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को सेमीकंडक्टर डिवाइस, फोटोनिक्स, वीएलएसआई डिजाइन, नैनो-प्रौद्योगिकी तथा आधुनिक सर्किट सिमुलेशन टूल्स जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी सत्र और व्याख्यान दिए जाएंगे।

पहले तकनीकी सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. राम चंद्र प्रसाद, प्राचार्य, सहरसा अभियंत्रण महाविद्यालय ने आधुनिक इंजीनियरिंग में उभरती तकनीकों और स्वचालन के महत्व पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्मार्ट सिस्टम के विकास में सेमीकंडक्टर तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

दूसरे तकनीकी सत्र में डॉ. चन्दन कुमार ने “थिन फिल्म सेमीकंडक्टर डिवाइस का विकास” विषय पर व्याख्यान देते हुए नई मैटेरियल्स आधारित पतली परत सेमीकंडक्टर डिवाइस के निर्माण, उनकी विशेषताओं और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उनके उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भविष्य में उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विकास में थिन फिल्म तकनीक की अहम भूमिका होगी।

इसके बाद आयोजित तकनीकी सत्र में एनआईटी सुरथकल से डॉ. गोपाल रावत ने सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स के भविष्य और अनुसंधान की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। वहीं आईआईटी भिलाई से डॉ. मनीष पांडेय ने आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों में उन्नत सर्किट डिजाइन और नई तकनीकों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों के लिए आकलन एवं फीडबैक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने दिनभर के तकनीकी सत्रों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष रवि रंजन, नवीन कुमार सहित अन्य सहायक प्राध्यापक मौजूद रहे।

कार्यशाला में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ विभिन्न संस्थानों के प्रतिभागी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से भाग ले रहे हैं। आयोजन समिति के अनुसार आने वाले दिनों में देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ भी अपने व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे।

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