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बाल देखरेख संस्थानों का त्रैमासिक निरीक्षण, डीएम ने दिए आवश्यक निर्देश




सुपौल। जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में बाल देखरेख संस्थानों के त्रैमासिक निरीक्षण के लिए गठित जिलास्तरीय निरीक्षण समिति द्वारा शुक्रवार को सुपौल जिले में समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा संचालित विभिन्न बाल देखरेख संस्थानों का निरीक्षण किया गया।

सबसे पहले सुखपुर स्थित पर्यवेक्षण गृह का निरीक्षण किया गया। यह गृह विधि-विवादित बच्चों के आवासन, देखरेख और संरक्षण के लिए संचालित है। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने संस्थान के बेहतर संचालन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

इसके बाद समिति ने पिपरा रोड स्थित यादव कॉम्प्लेक्स में संचालित विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान का निरीक्षण किया। इस दौरान उपस्थित चिकित्सा पदाधिकारी को निर्देश दिया गया कि जिले के सभी चिकित्सा संस्थानों को स्पष्ट रूप से जानकारी दी जाए कि किसी भी बच्चे को कानूनी प्रक्रिया के तहत गोद देने का अधिकार केवल विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान को है। जिलाधिकारी ने कहा कि किसी भी चिकित्सा केंद्र द्वारा परित्यक्त बच्चे को अवैध रूप से गोद देना कानूनन अपराध है और यह दंडनीय भी है।

इसके पश्चात समिति ने चैनसिंह पट्टी स्थित वृहद आश्रय गृह का निरीक्षण किया, जहां देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए संचालित दो बाल गृहों का भी जायजा लिया गया। जिलाधिकारी ने आश्रय गृह और बाल गृहों की स्वच्छता तथा बच्चों के आवासन की समुचित व्यवस्था की सराहना की।

इन दोनों बाल गृहों में रह रहे कुल 57 बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का भी अवलोकन किया गया। जिलाधिकारी ने बच्चों से बातचीत कर भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

जिलाधिकारी ने बताया कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत अनाथ, बेसहारा, घर से भागे हुए और परित्यक्त बच्चों की देखरेख के लिए बाल गृह संचालित किए जाते हैं। ऐसे बच्चों को बरामद होने के बाद बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है और उनके परिवार का पता चलने तक बाल गृह में रखा जाता है। परिवार का पता चलने पर उन्हें पुनर्वासित कर दिया जाता है।

निरीक्षण के दौरान समिति ने बाल गृहों में रह रहे बच्चों के उनके परिवारों में पुनर्वासन की संभावनाओं का भी आकलन किया और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करने का निर्देश दिया। साथ ही जिलाधिकारी ने बच्चों के कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने और इसके लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। निरीक्षण के दौरान सहायक निदेशक बाल संरक्षण, प्रभारी सिविल सर्जन, सर्वशिक्षा अभियान के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं सदस्य सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। 

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