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ईरान–इजरायल तनाव का असर अयोध्या तक, गैस संकट से मंदिरों की रसोई और प्रसाद व्यवस्था प्रभावित


 

अयोध्‍या। ईरान–इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर अब देश के धार्मिक शहरों तक भी देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के पवित्र नगर अयोध्या में एलपीजी गैस की आपूर्ति बाधित होने से मठ–मंदिरों की सामूहिक रसोइयों और प्रसाद निर्माण की व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। गैस की कमी के कारण कई धार्मिक स्थलों पर भोजन और प्रसाद तैयार करने का काम अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है।

सबसे अधिक असर अमावा मंदिर परिसर में संचालित ‘श्रीराम रसोई’ पर पड़ा है। मंदिर प्रशासन के अनुसार गैस उपलब्ध नहीं होने के कारण फिलहाल इस रसोई को स्थगित कर दिया गया है। यह रसोई प्रतिदिन लगभग 10 हजार श्रद्धालुओं को निःशुल्क भोजन कराती थी। रसोई बंद होने से बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को भोजन व्यवस्था में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि अब तक रसोई में प्रतिदिन कई गैस सिलेंडरों की खपत होती थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से गैस एजेंसियों की ओर से पर्याप्त सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। इसके कारण भोजन बनाने की प्रक्रिया बाधित हो गई है और मजबूरन रसोई सेवा को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है।

इधर हनुमानगढ़ी क्षेत्र में भी गैस संकट का असर साफ दिखाई दे रहा है। यहां करीब 150 दुकानदारों के सामने प्रसाद के रूप में बनने वाले लड्डू तैयार करने का संकट खड़ा हो गया है। दुकानदारों का कहना है कि लड्डू बनाने वाले कारखानों में गैस की कमी के कारण उत्पादन लगभग ठप हो गया है। ऐसे में दुकानों पर प्रसाद की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

स्थानीय व्यापारियों के अनुसार अयोध्या में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आते हैं और उनमें से अधिकांश मंदिरों में प्रसाद चढ़ाने के लिए लड्डू खरीदते हैं। लेकिन उत्पादन बंद होने से दुकानदारों के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा होने लगा है। स्थानीय व्यापार संगठनों और मंदिर प्रबंधन समितियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द गैस आपूर्ति सामान्य कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अयोध्या जैसे धार्मिक नगर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धाल

गैस की कमी का असर केवल मंदिरों और प्रसाद कारोबार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शहर के होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय पर भी पड़ा है। कई छोटे होटल संचालकों का कहना है कि उन्हें सीमित गैस सिलेंडरों में ही काम चलाना पड़ रहा है, जिससे भोजन बनाने की क्षमता कम हो गई है। इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी भोजन व्यवस्था में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।


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