सुपौल, बिहार। जिले में चल रहे ‘ज्ञान भारत मिशन’ के तहत पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। पिपरा प्रखंड के जोल्हनियां गांव से करीब 100 वर्ष पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपि की खोज की गई है, जो क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को उजागर करती है।
यह महत्वपूर्ण खोज गांव के निवासी शंभू शरण चौधरी के प्रयासों से संभव हो सकी। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह प्राचीन ग्रंथ डोमी मंडल (60 वर्ष) के घर से मिला है, जिसे उनके पूर्वजों द्वारा लिखा गया था और परिवार ने इसे पीढ़ियों से सहेज कर रखा था। डोमी मंडल द्वारा इस धरोहर को संरक्षित रखना नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
जिला प्रशासन के अनुसार, सुपौल में पांडुलिपियों के संरक्षण को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अब तक जिले में कुल 103 पांडुलिपियां खोजी जा चुकी हैं, जिनमें से 86 पांडुलिपियों को ‘ज्ञान भारतम्’ ऐप पर डिजिटल रूप में अपलोड कर वैश्विक स्तर पर साझा किया गया है।
जिलाधिकारी ने आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी के पास अपने पूर्वजों की कोई भी प्राचीन पांडुलिपि, ग्रंथ या दस्तावेज मौजूद है, तो उसे सामने लाएं। इससे हमारी विलुप्त होती सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में मदद मिलेगी और आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
इस अभियान से जुड़ने के लिए लोग अपने मोबाइल में ‘ज्ञान भारतम् (Gyan Bharatam)’ ऐप इंस्टॉल कर सकते हैं या जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। इस कार्य में सहयोग देने वाले व्यक्तियों को जिला स्तर पर सम्मानित भी किया जाएगा।
यह पहल न केवल सुपौल, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।


कोई टिप्पणी नहीं