- अब आधुनिक मशीनों से होगी वाहनों की फिटनेस जांच, सड़क सुरक्षा और पारदर्शिता को मिलेगा नया बल
- सुपौल बना बिहार का सातवां जिला जहां शुरू हुई ATS सुविधा; सहरसा, मधेपुरा, अररिया, पूर्णिया और मधुबनी के वाहन मालिकों को भी होगा लाभ
- आधुनिक मशीनों से होगी वाहनों की फिटनेस जांच
- व्यावसायिक वाहन मालिकों को स्थानीय स्तर पर बड़ी राहत
- सड़क दुर्घटनाओं में कमी और प्रदूषण नियंत्रण में मिलेगी मदद
- जागरूकता के अभाव में फिलहाल सीमित संख्या में पहुंच रहे वाहन
- जिला परिवहन पदाधिकारी ने समय पर फिटनेस जांच कराने की अपील की
सुपौल। परिवहन व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में सुपौल जिले ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कोशी कमिश्नरी का पहला स्वचालित वाहन परीक्षण स्टेशन (Automated Testing Station - ATS) अब सुपौल जिले के हटवरिया में चालू हो गया है। 25 मार्च से प्रारंभ इस अत्याधुनिक केंद्र ने न केवल सुपौल बल्कि पूरे कोशी क्षेत्र के वाहन स्वामियों और परिवहन व्यवसायियों के लिए बड़ी राहत और सुविधा का मार्ग खोल दिया है।
सुपौल जिला मुख्यालय से महज 04 किलोमीटर दूर, सुपौल–सिंहेश्वर पथ पर स्थित यह आधुनिक केंद्र लगभग 06 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया गया है। यह बिहार का सातवां तथा कोशी क्षेत्र का पहला स्वचालित वाहन फिटनेस परीक्षण केंद्र है।
अब तक कोशी क्षेत्र के वाहन स्वामियों को अपने व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच के लिए दरभंगा, भागलपुर या अन्य दूरस्थ जिलों की ओर जाना पड़ता था, जिससे समय, धन और श्रम—तीनों की अतिरिक्त खपत होती थी। लेकिन अब सुपौल में यह सुविधा उपलब्ध होने से सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया, मधुबनी और पूर्णिया सहित आसपास के जिलों के लोगों को स्थानीय स्तर पर आधुनिक सुविधा का लाभ मिल सकेगा।
स्वचालित परीक्षण स्टेशन का शुभारंभ केवल एक तकनीकी सुविधा का विस्तार नहीं, बल्कि सुपौल जिले के प्रशासनिक, तकनीकी और अवसंरचनात्मक विकास की दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। यह परियोजना इस बात का प्रमाण है कि अब सुपौल जैसे जिलों में भी राज्य और केंद्र सरकार की आधुनिक, तकनीक आधारित सेवाएं तेजी से पहुंच रही हैं।
यह केंद्र सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों एवं केंद्रीय मोटरयान नियमावली, 1989 के अनुरूप विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य वाहनों की फिटनेस जांच को मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त, पारदर्शी, वैज्ञानिक और विश्वसनीय बनाना है।
स्वचालित परीक्षण स्टेशन यानी ATS एक ऐसा आधुनिक केंद्र है, जहां वाहनों की फिटनेस जांच पारंपरिक निरीक्षण पद्धति के बजाय उन्नत मशीनों एवं स्वचालित तकनीकी उपकरणों से की जाती है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि वाहन की वास्तविक तकनीकी स्थिति का निष्पक्ष और सटीक आकलन संभव हो पाता है।
यहां ब्रेक सिस्टम की क्षमता, हेडलाइट एलाइनमेंट, व्हील एलाइनमेंट और साइड स्लिप, सस्पेंशन की गुणवत्ता, स्पीडोमीटर परीक्षण, प्रदूषण स्तर, अन्य सुरक्षा मानकों की तकनीकी जांच समेत निम्न प्रमुख बिंदुओं पर वाहन की जांच की जाती है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि सड़क पर वही वाहन संचालित हों, जो वास्तव में सुरक्षित, तकनीकी रूप से सक्षम और मानक अनुरूप हों।
ATS की शुरुआत का सीधा असर सड़क सुरक्षा पर पड़ेगा। खराब ब्रेक, खराब सस्पेंशन, गलत हेडलाइट एलाइनमेंट, अत्यधिक प्रदूषण और तकनीकी रूप से दोषपूर्ण वाहन सड़क दुर्घटनाओं के बड़े कारणों में शामिल हैं। ऐसे में वैज्ञानिक फिटनेस जांच से दोषपूर्ण वाहनों की पहचान आसान होगी और उन्हें समय रहते दुरुस्त कराया जा सकेगा।
इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी, यात्रियों और आम लोगों की सुरक्षा बढ़ेगी, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नियंत्रण होगा, परिवहन व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और उत्तरदायी बनेगी। यानी यह सुविधा केवल वाहन मालिकों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए उपयोगी है। इस आधुनिक परीक्षण केंद्र के प्रारंभ होने से सबसे अधिक लाभ व्यावसायिक वाहनों—जैसे बस, ट्रक, टैक्सी, मालवाहक एवं अन्य कमर्शियल वाहनों—के स्वामियों और संचालकों को मिलेगा।
पहले वाहन फिटनेस जांच के लिए दूसरे जिलों में जाना पड़ता था, जिससे पूरा दिन या कई बार दो दिन तक समय लगता था, डीजल/ईंधन और परिचालन लागत बढ़ती थी, वाहन संचालन में बाधा आती थी, चालकों एवं मालिकों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती थी। अब यह सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से समय, लागत और श्रम की बचत होगी तथा व्यवसायिक गतिविधियों में सुगमता आएगी।
हालांकि यह केंद्र अत्यंत उपयोगी और क्षेत्र के लिए बड़ी सुविधा है, फिर भी जानकारी और जन-जागरूकता के अभाव में फिलहाल यहां प्रतिदिन केवल 04 से 05 वाहन ही फिटनेस जांच के लिए पहुंच रहे हैं। ATS का संचालन कर रही जय शिव कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोपराइटर सुजीत कुमार ने बताया कि यह कोशी कमिश्नरी का पहला एटीएस है। आसपास के जिलों से भी वाहन यहां पहुंच रहे हैं, लेकिन अभी बहुत से वाहन स्वामी इस सुविधा से पूर्णतः परिचित नहीं हैं। जैसे-जैसे जागरूकता बढ़ेगी, यहां वाहनों की संख्या में तेजी आएगी।
बिहार में अभी सीमित जिलों में ही स्वचालित परीक्षण स्टेशन संचालित हो रहे हैं। सुपौल के अलावा पटना, भागलपुर, वैशाली, नालंदा, रोहतास और दरभंगा में इस तरह की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में सुपौल में ATS की शुरुआत पूरे कोशी क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। यह न केवल प्रशासनिक सुविधा का विस्तार है, बल्कि यह इस बात का संकेत भी है कि अब बुनियादी और आधुनिक सरकारी सुविधाएं जिला स्तर तक तेजी से पहुंच रही हैं।
जिला परिवहन पदाधिकारी डॉ. संजीव कुमार सज्जन ने वाहन स्वामियों से अपील की है कि वे अपने वाहनों की फिटनेस जांच समय पर कराएं और फिटनेस प्रमाण-पत्र की वैधता बनाए रखें। कहा कि सुपौल में स्वचालित परीक्षण स्टेशन का संचालन शुरू होना जिले और पूरे कोशी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे वाहन फिटनेस जांच की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और विश्वसनीय बनेगी। वाहन स्वामी समय पर फिटनेस जांच कराकर सड़क सुरक्षा और विधि अनुपालन सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि “बिना वैध फिटनेस प्रमाण-पत्र के वाहन का संचालन कानूनन अपराध है। सुपौल में ATS के शुरू होने से अब वाहन स्वामियों को स्थानीय स्तर पर ही पारदर्शी, त्वरित और वैज्ञानिक जांच की सुविधा उपलब्ध हो गई है। यह सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और बेहतर यातायात व्यवस्था की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है।”उन्होंने आगे कहा कि विभाग द्वारा इस केंद्र की नियमित निगरानी की जाएगी ताकि सभी जांच प्रक्रियाएं केंद्रीय मोटरयान नियमावली, 1989 के अनुरूप संचालित होती रहें।
जिला प्रशासन और परिवहन विभाग ने आम जनता, वाहन स्वामियों, परिवहन व्यवसायियों, बस ऑपरेटरों, ट्रक मालिकों, टैक्सी चालकों एवं अन्य व्यावसायिक वाहन संचालकों से अपील की है कि वे इस आधुनिक सुविधा का लाभ उठाएं और अपने वाहनों की फिटनेस जांच समय पर कराएं।
कहा कि यह कदम आपकी सुरक्षा के लिए जरूरी है, यात्रियों की जान की सुरक्षा से जुड़ा है, कानून पालन के लिए आवश्यक है और बेहतर, सुरक्षित एवं व्यवस्थित सड़क परिवहन व्यवस्था की आधारशिला है।



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