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301 कन्याओं की भव्य कलश यात्रा के साथ श्री पार्वती माता मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का हुआ शुभारंभ



सुपौल। सदर प्रखंड परिसर स्थित नवनिर्मित श्री पार्वती माता मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा एवं उद्घाटन महोत्सव का शुभारंभ मंगलवार को 301 कन्याओं की भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और माता के जयकारों से पूरा शहर भक्तिमय माहौल में डूब गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कलश यात्रा में भाग लेकर आयोजन को भव्य स्वरूप प्रदान किया।

मंदिर परिसर से शुरू हुई कलश यात्रा में सिर पर कलश लिए 301 कन्याएं श्रद्धा और अनुशासन के साथ शामिल हुईं। यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए गांधी मैदान स्थित पोखर पहुंची, जहां वैदिक विधि-विधान के अनुसार कलशों में पवित्र जल भरा गया। इसके बाद श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों, गाजे-बाजे और "जय माता दी" तथा "हर-हर महादेव" के जयघोष के साथ पुनः मंदिर परिसर लौटे। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया। महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी से पूरा वातावरण आस्था और उत्साह से सराबोर रहा।

मंदिर निर्माण एवं आयोजन समिति के सदस्य मोती चौधरी और पप्पू कुमार ने बताया कि प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मंगलवार को मूर्ति भ्रमण, कलश यात्रा और भव्य जागरण का आयोजन किया गया, जबकि बुधवार 24 जून को माता पार्वती की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा, मंदिर का विधिवत उद्घाटन तथा महाप्रसाद वितरण किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि प्राण-प्रतिष्ठा से जुड़े सभी वैदिक अनुष्ठान काशी से आए विद्वान आचार्यों एवं पंडितों के सान्निध्य में संपन्न कराए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है तथा आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई हैं।

कलश यात्रा में केदार चौधरी, छबीनाथ चौधरी, शंकर राम, बलेन्द्र साह, संतोष कुमार, मंटू चौधरी, प्रमोद साह, अमन कुमार, सुभाष कुमार, श्रीराम, उत्सव कुमार, बबलू चौधरी, सुजीत बिस्वास, चंचल सिंह, हीरा चौधरी, नारायण चौधरी, खोखा भगत सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं एवं युवा उपस्थित रहे।

प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर पूरे क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। श्रद्धालुओं को अब 24 जून को होने वाले मुख्य अनुष्ठान, मंदिर उद्घाटन और महाप्रसाद वितरण का बेसब्री से इंतजार है।

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