सुपौल। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर शुक्रवार को पिपरा थाना परिसर में पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों ने थाना क्षेत्र को बाल मजदूरी मुक्त बनाने का संकल्प लिया। इस मौके पर आयोजित कार्यशाला में बाल श्रम उन्मूलन, बच्चों के अधिकारों की रक्षा और जनजागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए थानाध्यक्ष किशोर कुमार ने बाल श्रम निषेध की प्रस्तावना पढ़कर सभी पुलिसकर्मियों को शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि बाल श्रम बच्चों को उनके मौलिक अधिकार, शिक्षा और बचपन से वंचित कर देता है। इसके पीछे गरीबी, अशिक्षा और जागरूकता की कमी प्रमुख कारण हैं।
उन्होंने निर्देश दिया कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से मजदूरी कराने वालों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाकर अभिभावकों को बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित किया जाए।
थानाध्यक्ष ने बताया कि भारत सरकार ने वर्ष 1986 में बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम लागू किया था, जिसके तहत बच्चों से श्रम कराना दंडनीय अपराध है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 से प्रत्येक वर्ष 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है, ताकि समाज को इस गंभीर समस्या के प्रति जागरूक किया जा सके।
उन्होंने कहा कि बाल मजदूरी रोकना केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। बच्चों का पुनर्वास कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।
कार्यशाला के दौरान यह भी चर्चा हुई कि बाल श्रम उन्मूलन में श्रम विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन पिपरा प्रखंड में विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी द्वारा कोई विशेष अभियान या जागरूकता कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाने पर सवाल उठे। कार्यक्रम के अंत में सभी पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों ने संकल्प लिया कि वे हर बच्चे का बचपन सुरक्षित रखने और उन्हें शिक्षा से जोड़ने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेंगे।

कोई टिप्पणी नहीं