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निर्मली : आरएसएस की बैठक में पंच परिवर्तन पर हुआ मंथन

 


सुपौल। निर्मली अनुमंडल क्षेत्र के बेला सिंगार मोती स्थित पंचायत सरकार भवन परिसर में पंच परिवर्तन विषय को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक प्रवीर जी ने की।

बैठक को संबोधित करते हुए प्रवीर जी ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को संगठन और सेवा के 100 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयादशमी (विक्रम संवत 1982) के दिन हुई थी और आज यह विश्व का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन बन चुका है। उन्होंने कहा कि जब देश स्वतंत्रता संग्राम के दौर से गुजर रहा था, तब संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव हेडगेवार ने यह विचार रखा था कि राष्ट्र की स्वतंत्रता के बाद उसके परम वैभव की प्राप्ति तथा समाज की स्थायी समस्याओं का समाधान केवल संगठित हिंदू समाज से ही संभव है। इसी उद्देश्य से जाति, भाषा, वेश-भूषा और प्रांतों की विविधताओं को भेद मानकर बंटे हिंदू समाज को हिंदुत्व के आधार पर संगठित करने का विचार सामने आया और संघ की स्थापना हुई।

प्रवीर जी ने कहा कि संघ आज शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अनेक सामाजिक क्षेत्रों में लगातार सेवा कार्य कर रहा है, लेकिन वर्तमान समय में समाज को दिशा देने के लिए पंच परिवर्तन की आवश्यकता है। बैठक में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी पंच परिवर्तन के विभिन्न पहलुओं पर अपने-अपने विचार रखे। इस अवसर पर खंड संचालक कुशेश्वर जी, खंड कार्यवाह इंद्रदेव जी, भूतपूर्व सरपंच रामशरण जी, विवेक कुमार, कालीचरण मेहता, अभिनंदन कुमार, प्रणव जी, रूपेश कुमार, महेंद्र जी सहित कई स्वयंसेवक एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

वहीं जिला प्रचारक राहुल देव जी ने अपने संबोधन में कहा कि स्वयंसेवक निरंतर समाज परिवर्तन और समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय रहते हैं, किंतु संघ के शताब्दी वर्ष के उपरांत पाँच विषयों पर विशेष जन-जागरण की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पंच परिवर्तन के अंतर्गत सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, स्व-आधारित जीवन और नागरिक कर्तव्यबोध जैसे विषय शामिल हैं। इन विषयों पर सज्जन शक्ति के सहयोग से व्यापक प्रयास किए जाएंगे, ताकि अमृत काल में सभी के सामूहिक प्रयास से भारत माता को परम वैभव तक पहुंचाया जा सके।


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