सुपौल। सरायगढ़-भपटियाही प्रखंड क्षेत्र के पिपराखुर्द गांव के वार्ड संख्या–5 में सात दिवसीय वैदिक सप्ताहिक भागवत कथा एवं महाज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन किया गया है। आयोजन स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भागवत कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे क्षेत्र का माहौल भक्तिमय बना हुआ है।
सप्ताहिक वैदिक भागवत कथा महायज्ञ में कोलकाता से पधारे कथावाचक आचार्य योगेश शास्त्री उर्फ आचार्य योगेश महाराज ने शनिवार को प्रवचन के दौरान कहा कि मनुष्य जीवन की आधारशिला सनातन संस्कृति में वर्णित 16 संस्कारों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि अन्य प्राणी ईश्वर द्वारा निर्धारित स्वाभाविक जीवनशैली में जीवन व्यतीत करते हैं, जबकि मनुष्य माता-पिता, गुरुजनों एवं समाज से प्राप्त शिक्षा व परंपराओं के माध्यम से अच्छे-बुरे कर्मों को ग्रहण करता है। इसी कारण मनुष्य को संस्कार रूपी आवरण की आवश्यकता होती है।
आचार्य ने बताया कि संस्कारयुक्त जीवन मनुष्य को कुरीतियों, कुविचारों और नकारात्मक प्रभावों से बचाता है तथा आत्मोत्थान के मार्ग पर आगे बढ़ाता है। वेदों के आदेश “मनुर्भव” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संस्कार मनुष्य को मनुष्य बनाए रखने के साथ-साथ देवत्व, ऋषित्व और अंततः मोक्ष की ओर ले जाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने वेद वाक्य “संस्काराद् द्विज कुल उच्येते” का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्कारों से ही व्यक्ति और कुल का उत्थान संभव है।
उन्होंने गृहस्थों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि उत्तम संतान की कामना हो तो वैदिक परंपरा के अनुसार 16 संस्कारों का पालन आवश्यक है। इसके लिए महर्षि दयानंद सरस्वती प्रणीत संस्कार विधि एवं सत्यार्थ प्रकाश के अध्ययन को उन्होंने मार्गदर्शक बताया।
कार्यक्रम में संभल से पधारीं भजन गायिका श्रीमती पुष्पा शास्त्री के सुमधुर भजनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। वहीं श्री देवमुनि वानप्रस्थ एवं श्री कृष्णमुनि वानप्रस्थ महाराज का सान्निध्य और आशीर्वाद भी श्रद्धालुओं को प्राप्त हो रहा है।
इस अवसर पर गोतमपुर (नेपाल) से आए कृष्ण मुनि रामकृष्ण शास्त्री, देव मुनि, पिपराखुर्द गांव के लाल बहादुर शास्त्री, उत्तर प्रदेश से आईं भजन उपदेशिका पुष्पा शास्त्री, भजनोपदेशक ब्रह्मचारी बसंत आर्य, देव सुंदर मेहता, अरविंद कुमार, अनिता देवी, बिमला देवी सहित अन्य साधु-संतों द्वारा कथावाचन एवं हवन-यज्ञ संपन्न कराया जा रहा है। स्थानीय श्रद्धालु बढ़-चढ़कर आहुति देकर कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।

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