सुपौल। भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर तैनात एसएसबी 45वीं वाहिनी की सीमा चौकी कुनौली ने सतर्कता एवं प्रभावी निगरानी के दौरान प्राचीन एवं पुरातात्विक महत्व की प्रतीत होने वाली मूर्तियों के साथ एक नेपाली नागरिक को गिरफ्तार किया है। बरामद मूर्तियों को कब्जे में लेकर आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए स्थल सीमा शुल्क कार्यालय (एलसीएस) कुनौली के सुपुर्द कर दिया गया।
एसएसबी 45वीं वाहिनी के द्वितीय कमान अधिकारी जगदीश कुमार वर्मा ने बताया कि सीमा चौकी कुनौली के कार्यक्षेत्र में भारत-नेपाल सीमा पर अवैध तस्करी, प्रतिबंधित वस्तुओं के आवागमन तथा संदिग्ध गतिविधियों की रोकथाम के लिए विशेष जांच एवं निगरानी अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान शनिवार सुबह एक व्यक्ति नेपाल की ओर से पीले रंग के कपड़े में कुछ सामान लेकर भारतीय क्षेत्र की ओर आता दिखाई दिया।
सुरक्षा बलों को देखकर उक्त व्यक्ति घबराकर तेजी से आगे बढ़ने लगा। उसकी संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए एसएसबी जवानों ने उसे रोककर पूछताछ की। पूछताछ में उसने अपनी पहचान रामचन्द्र मुखिया, निवासी सकरपुरा, जिला सप्तरी (नेपाल) के रूप में बताई।
तलाशी के दौरान उसके पास से धातु निर्मित भगवान श्रीकृष्ण की लगभग 26 सेंटीमीटर लंबी क्षतिग्रस्त मूर्ति, राधा जी की लगभग 23 सेंटीमीटर लंबी मूर्ति, लगभग 15 सेंटीमीटर लंबी क्षतिग्रस्त गाय की आकृति तथा एक धातु निर्मित आसन/प्लेट (लगभग 18 सेंटीमीटर लंबी) बरामद की गई।
प्रारंभिक जांच में बरामद मूर्तियां एवं अन्य सामग्री धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व की प्रतीत हुईं। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार व्यक्ति ने बताया कि उसे ये मूर्तियां तिरजुगा नदी के किनारे मिली थीं और वह इन्हें भारत में जांच कराने तथा बेचने के उद्देश्य से लेकर आ रहा था। हालांकि, वह मूर्तियों के स्वामित्व, परिवहन अथवा खरीद-बिक्री से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
एसएसबी अधिकारियों ने बताया कि बरामद वस्तुओं की प्रकृति, संदिग्ध परिस्थितियों तथा आवश्यक दस्तावेजों के अभाव को देखते हुए सभी मूर्तियों एवं संबंधित सामग्री को विधिवत जब्त कर सुरक्षित रखा गया। इसके बाद आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी कर गिरफ्तार व्यक्ति को बरामद सामान सहित आगे की विधिक कार्रवाई के लिए स्थल सीमा शुल्क कार्यालय, कुनौली को सौंप दिया गया। मामले की जांच जारी है तथा बरामद मूर्तियों के वास्तविक ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व का आकलन संबंधित विभागों द्वारा किया जाएगा।


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