सुपौल। जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में गठित जिलास्तरीय निरीक्षण समिति ने शनिवार को समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा संचालित विभिन्न बाल देखरेख संस्थानों का त्रैमासिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, आवासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया।
सबसे पहले समिति ने सुखपुर स्थित पर्यवेक्षण गृह का निरीक्षण किया, जहां विधि-विवादित बच्चों के आवासन, देखरेख एवं संरक्षण की व्यवस्था का अवलोकन किया गया। जिलाधिकारी ने गृह के बेहतर संचालन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसके बाद पिपरा रोड स्थित यादव कॉम्प्लेक्स में संचालित विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान का निरीक्षण कर दत्तक ग्रहण से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई।
निरीक्षण के क्रम में समिति चैनसिंह पट्टी स्थित वृहद आश्रय गृह पहुंची, जहां देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए संचालित दो बाल गृहों का निरीक्षण किया गया। यहां कुल 59 बच्चों के लिए उपलब्ध आवासन, भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का अवलोकन किया गया। जिलाधिकारी ने बच्चों से सीधे बातचीत कर सुविधाओं की जानकारी ली और संस्थान की स्वच्छता तथा समुचित व्यवस्थाओं की सराहना की।
जिलाधिकारी ने बताया कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत अनाथ, बेसहारा, घर से भागे हुए एवं परित्यक्त बच्चों के संरक्षण के लिए इन बाल गृहों का संचालन किया जाता है। बच्चों के परिवार का पता चलने पर उन्हें नियमानुसार पुनर्वासित किया जाता है।
निरीक्षण के दौरान बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों को निर्देश दिया गया कि जिन बच्चों के माता-पिता का पता चल चुका है, उनकी काउंसलिंग कर शीघ्र पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। साथ ही अन्य जिलों के बच्चों के मामलों में संबंधित बाल कल्याण समितियों से समन्वय स्थापित कर जल्द पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी करने का भी निर्देश दिया गया। इस अवसर पर सहायक निदेशक, बाल संरक्षण, सिविल सर्जन, रेड क्रॉस सोसायटी के चेयरमैन, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं सदस्य सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।


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