सुपौल। सुपौल अंचल कार्यालय में कथित भ्रष्टाचार, दलाल-राज एवं राजस्व संबंधी समस्याओं को लेकर गुरुवार को हजारों रैयत किसानों, मजदूरों और भूमिहीन परिवारों ने गांधी मैदान से जिला समाहरणालय तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम संबोधित मांग पत्र जिला पदाधिकारी को सौंपा गया।
प्रदर्शन का नेतृत्व लोरिक विचार मंच के प्रदेश संयोजक डॉ. अमन कुमार ने किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां एक ओर जिला पदाधिकारी के कार्यों की पारदर्शिता और जनहितैषी पहल की सराहना हो रही है, वहीं सुपौल अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली से आम जनता परेशान है। उनका कहना था कि भूमिहीन परिवार वासगीत पर्चा, किसान दाखिल-खारिज एवं परिमार्जन और आम नागरिक शुद्धि पत्र जैसे कार्यों के लिए महीनों कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
डॉ. अमन कुमार ने आरोप लगाया कि सीमांकन जैसे तकनीकी कार्यों में भी अवैध वसूली की शिकायतें मिल रही हैं तथा अंचल कार्यालय में दलालों का प्रभाव बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि भ्रष्ट व्यवस्था के विरोध में है, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने आरटीपीएस (RTPS) के निष्पादन के सरकारी दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सहयोग शिविर में प्राप्त अधिकांश आवेदनों का सतही तरीके से निष्पादन या निराकरण किया गया। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जिला स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि मई माह में सुपौल अंचल की रैंकिंग 53वें स्थान से गिरकर 404वें स्थान पर पहुंच गई, जो कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
प्रदर्शन में शामिल राजीव कुमार ने आरोप लगाया कि सुंदरपुर रेलवे हॉल्ट के समीप बसे परिवारों को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद अब वासगीत पर्चा के लिए भटकना पड़ रहा है। वहीं सुधीर मिश्र, चंदेश्वरी सादा और शशि भूषण मंडल ने कहा कि भूमिहीन परिवारों को सरकारी जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया बेहद धीमी है और आम लोगों को कार्यालय के लगातार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
प्रदर्शन में नरेश राम, शंभू यादव, भोगी मंडल, मधुलाल सादा, पंकज कुमार, गौतम कुमार, भवेश कुमार, कृष्ण कुमार, ललित कुमार, जाशो सादा, रंजीत पौदार, सतो सादा, फुलेन्द्र यादव, मोहन यादव, गोपाल क्रांति, सुरेश सादा, सुशीला देवी, फूलो सादा, बद्री मंडल समेत बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और भूमिहीन परिवार शामिल रहे।

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