सुपौल। बिहार, उड़ीसा और झारखंड के अमीर-ए-शरीअत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी ने कहा कि किसी भी देश और समाज के विकास का मूल आधार शिक्षा और ज्ञान है। समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए धार्मिक, नैतिक और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
वे रविवार को सुपौल जिले के नुनुपट्टी स्थित मदीना जामा मस्जिद परिसर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उनके साथ एमारत-ए-शरिया पटना के प्रोजेक्ट मैनेजर अल्हाज एहसान-उल-हक, काज़ी रज़ी अहमद, मौलाना मंज़र अली कासमी, हाफिज़ एहतेशाम रहमानी समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।
सभा को संबोधित करते हुए सुपौल के काज़ी मुफ़्ती अबुल कासिम रहमानी, सहरसा स्थित जामिया इस्लाह अल-बनात के सदर मुदर्रिस मुफ़्ती मेराज सईद कासमी तथा मौलाना निज़ामुद्दीन शताशी ने अभिभावकों से अपने बच्चों की धार्मिक एवं आधुनिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षित, संस्कारी और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण पीढ़ी ही देश और समाज का उज्ज्वल भविष्य तैयार कर सकती है।
वक्ताओं ने सामाजिक बुराइयों से दूर रहने, आपसी भाईचारा एवं एकता को मजबूत करने तथा मानव सेवा की भावना को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज की बेहतरी के लिए सामूहिक प्रयास और नैतिक जागरूकता आवश्यक है।
कार्यक्रम की शुरुआत मुफ़्ती शफीउल्लाह कासमी द्वारा पवित्र कुरान की तिलावत से हुई, जबकि प्रसिद्ध शायर कैसर अली राणा ने नात-ए-पाक पेश कर माहौल को रूहानी बना दिया।
जलसे में तंजीम एमारत-ए-शरिया सुपौल के महासचिव जमालुद्दीन, मौलाना मुनव्वर कासमी, मिथिला हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक हाफिज़ नसीम इकबाल, मुहम्मद राशिद उर्फ जुमन सहित बड़ी संख्या में उलेमा, बुद्धिजीवी एवं आमजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के उपरांत वरिष्ठ पत्रकार राजा मुराद ने अमीर-ए-शरीअत का अपने आवास पर स्वागत किया। वहीं कार्यक्रम को सफल बनाने में मौलाना अयूब, मुहम्मद फ़ख़रुद्दीन, मौलाना हारून राशिद, मो. सलीम, मो. जब्बार, मो. अनवर आलम, ज़ुबैर आलम, मो. अलाउद्दीन, मो. मेराज और मो. नसीम सहित कई लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंत में देश, समाज और मानवता की तरक्की, अमन-चैन तथा खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई।

कोई टिप्पणी नहीं