सुपौल। सरकारी अभिलेखों में एक जीवित बुजुर्ग को मृत घोषित किए जाने का मामला सामने आया है। इसके कारण 65 वर्षीय बेचू पासवान की कई माह से सामाजिक सुरक्षा पेंशन बंद है। पीड़ित ने अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, सुपौल के समक्ष शिकायत दर्ज कर पेंशन पुनः चालू कराने की मांग की है।
मामला किशनपुर प्रखंड की परसा माधो पंचायत के कलमुगरा गांव वार्ड संख्या-3 निवासी बेचू पासवान से जुड़ा है। अपने आवेदन में उन्होंने कहा है कि वे जीवित हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्शा दिया गया है। इसके कारण उन्हें कई महीनों से वृद्धावस्था पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है।
शिकायत पर संज्ञान लेते हुए अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने मामले की जांच का निर्देश प्रखंड विकास पदाधिकारी, किशनपुर को दिया। इसके बाद कार्यपालक सहायक दिलीप कुमार एवं उर्दू अनुवादक मो. समीर द्वारा जांच की गई।
जांच रिपोर्ट में बताया गया कि आवेदक के नाम पर दो पेंशन योजनाएं दर्ज थीं। इनमें एक विधवा पेंशन और दूसरी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना की पेंशन शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार विधवा पेंशन बंद कर दी गई है। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि लाभार्थी का बायोमेट्रिक सत्यापन (फिंगरप्रिंट एवं आंख की पहचान) नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण जीवन प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
बेचू पासवान का आरोप है कि गांव की राजनीति के कारण उन्हें जानबूझकर मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि वे गरीब मजदूर हैं और किसी तरह जीवनयापन कर रहे हैं। पेंशन बंद होने के बाद उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि समस्या के समाधान के लिए वे कई महीनों से प्रखंड और जिला कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
फिलहाल मामला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में विचाराधीन है और पीड़ित को जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

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