सुपौल। मुख्यमंत्री बिहार द्वारा बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के 211 नवस्थापित राजकीय डिग्री महाविद्यालयों का उद्घाटन किया गया। इसी क्रम में सुपौल जिले के छह नए राजकीय डिग्री महाविद्यालयों का भी विधिवत शुभारंभ हुआ। इससे जिले के हजारों छात्र-छात्राओं को अपने ही क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का बेहतर अवसर मिलेगा।
सुपौल जिले में जिन महाविद्यालयों का उद्घाटन हुआ, उनमें राजकीय डिग्री महाविद्यालय पिपरा, छातापुर, सरायगढ़-भपटियाही, किशनपुर, प्रतापगंज और मरौना शामिल हैं।
पिपरा में आयोजित उद्घाटन समारोह में सांसद दिलेश्वर कामैत, स्थानीय मुखिया, सरपंच एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। छातापुर में विधायक नीरज कुमार सिंह, प्रखंड प्रमुख, मुखिया एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने उद्घाटन कार्यक्रम में भाग लिया।
सरायगढ़-भपटियाही में विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव, जिलाधिकारी सावन कुमार, विश्वविद्यालय प्रतिनिधि प्रो. डॉ. गुलरेज रौशन रहमान, सरपंच, पूर्व मुखिया एवं अन्य गणमान्य लोगों की मौजूदगी में कॉलेज का उद्घाटन हुआ। किशनपुर में विधायक रामविलास कामत, प्रखंड प्रमुख सूर्य नारायण प्रसाद एवं अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
प्रतापगंज में पूर्व विधायक लखन ठाकुर, प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि रमेश प्रसाद यादव, विश्वविद्यालय प्रतिनिधि डॉ. संग्राम सिंह, सेवानिवृत्त प्राचार्य नागेश्वर विराजी सहित कई गणमान्य लोगों ने उद्घाटन समारोह में भाग लिया।
वहीं मरौना में मुखिया जितेन्द्र कुमार यादव, पूर्व मुखिया एजाजुल हक, विष्णुदेव यादव, चन्द्रशेखर यादव, सरपंच देव नारायण यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में महाविद्यालय का शुभारंभ किया गया।
प्रशासन के अनुसार, नवस्थापित महाविद्यालयों के संचालन के लिए फर्नीचर, उपस्कर और अन्य आवश्यक स्टेशनरी सामग्री उपलब्ध करा दी गई है। जिन विद्यालय भवनों में फिलहाल महाविद्यालय संचालित होंगे, वहां मरम्मत एवं जीर्णोद्धार का कार्य भी पूरा कर लिया गया है।
छात्राओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पिंक बस सेवा की व्यवस्था की गई है, ताकि उनके नामांकन, नियमित उपस्थिति और सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित किया जा सके।
इसके अलावा, सभी महाविद्यालयों के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। प्रशासन का कहना है कि जल्द ही स्थायी भवन निर्माण की दिशा में भी कार्य शुरू किया जाएगा।
इन छह नए राजकीय डिग्री महाविद्यालयों के शुरू होने से सुपौल जिले के ग्रामीण एवं दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं, को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसे जिले की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

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